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भारतकोश
भविष्य पुराण

भविष्य पुराण

Bhavishya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

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  • संक्षिप्त भविष्यपुराण *

भविष्योत्तरपर्वकी संक्षिप्त अनुक्रमणिका

इस पर्वके प्रारम्भमें महाराज युधिष्ठिरके पास महर्षि वेदव्यासके साथ अनेक ऋषियोंके आगमन, ब्रह्माण्डकी उत्पत्ति, नारदको वैष्णवीमायाका दर्शन, संसारके दोषोंका वर्णन, पापोंके भेद, शुभ और अशुभ लक्षणोंका वर्णन है। शकटव्रत, तिलकव्रत, अशोक और करवीर, कोकिला, बृहत्तप, भद्रोपवास, यमद्वितीया, अशून्यशयन, कामाख्यातृतीया, मेघपाली, पञ्चाग्निसाधन, त्रिरात्रगोष्पद, हरकाली, ललिता-तृतीया, योगाख्यातृतीया, उमामहेश्वरव्रत, रम्भा-तृतीया, सौभाग्यतृतीया, आर्द्रानन्दकरीतृतीया तथा चैत्र, भाद्र और माघके तृतीयाव्रतोंका वर्णन हुआ है। फिर आनन्तर्यतृतीया, विनायक-शान्ति, सारस्वतव्रत, नागपञ्चमी, श्रीपञ्चमी, शोकप्रणाशिनीषष्ठी, फलषष्ठी, मन्दारषष्ठी, ललिताषष्ठी, कार्तिकेयषष्ठी, महत्तपससमी, विभूषाससमी, आदित्यमण्डपविधि, त्रयोदशवर्ज्यससमी, कृकवाकुप्लवङ्गससमी, उभयससमी, कल्याणससमी, शर्कराससमी, कमलाससमी, शुभाससमी, स्नपनससमी, व्रतससमी और अचलाससमी, बुधाष्टमी, जन्माष्टमी, दूर्वाष्टमी, कृष्णाष्टमी, अनघाष्टमी, अर्काष्टमी व्रतोंका वर्णन है। तदनन्तर श्रीवृक्षनवमी, ध्वजनवमी, उल्कानवमी, दशावतार, आशादशमी, रोहिणीचन्द्र, इन्द्रहरि-शम्भु-ब्रह्मा-सूर्य-अवियोगव्रत, गोवत्सद्व्रादशी, नीराजनद्व्रादशी, भीष्मपञ्चक, मल्लद्व्रादशी, भीमाद्व्रादशी, श्रवणद्व्रादशी, सम्प्रासिद्धादशी, गोविन्दद्व्रादशी, अखण्डद्व्रादशी, तिलद्व्रादशी,

सुकृतद्व्रादशी, धरणीव्रत, विशोकद्व्रादशी, विभूतिद्व्रादशी, पुष्यद्व्रादशी, श्रवणद्व्रादशी, अनङ्गद्व्रादशी, अङ्गुपादव्रत, निम्बार्क-करवीर-माहात्म्य, यमदर्शनत्रयोदशी, अनङ्गत्रयोदशी, पालीव्रत, रम्भाव्रत, आग्रेयी चतुर्दशी, अनन्तचतुर्दशी, श्रावणी, नक्तचतुर्दशी, शिवचतुर्दशी, फलत्यागचतुर्दशीव्रत तथा वैशाख, कार्तिक और माघकी पूर्णिमाके माहात्म्यका वर्णन किया गया है। तत्पश्चात् कार्तिकमें कृत्तिकाके योगमें कृत्तिकाव्रत, फाल्गुन पूर्णिमामें पूर्णमनोरथव्रत, अशोकपूर्णिमाव्रत, अनन्तव्रत, साम्भरायणीव्रत, नक्षत्रपुरुषव्रत, शिवनक्षत्रपुरुषव्रत, कामदानव्रत, वृत्ताकविधि, आदित्यदिननक्तव्रत, संक्रान्तिके उद्यापनका विधान, भद्राव्रत, अगस्त्यार्घ्यव्रत, नवचन्द्रार्घ्य, शुक्र-बृहस्पति-अर्घ्य-प्रदानव्रत, पञ्चाशीतिव्रत, माघस्नान, नित्यस्नान, रुद्रस्नानकी विधि, चन्द्र और सूर्य-ग्रहणमें स्नान, भोजन-विधि, वापी, कूप तथा तडागका उत्सर्ग, वृक्ष-पूजा, देवपूजा, दीपदान, वृषोत्सर्गविधि, फाल्गुनी-उत्सव, मदनोत्सव, भूतमातोत्सव, श्रावणीमें रक्षाबन्धनकी विधि, चन्द्रोत्सव, दीपमालिका, होम, लक्षहोम, कोटिहोमकी विधि, महाशान्ति तथा विनायक-शान्ति, नक्षत्रहोम, गोदान-विधि, गुडधेनु, घृतधेनु, तिलधेनु, जलधेनु, लवणधेनु और नवनीतधेनु एवं सुवर्णधेनुदानके विधानोंका निरूपण हुआ है। ये सभी देवकार्य हैं, कल्याणकामी पुरुषोंको इन धर्मकार्योंको यथाशक्ति अवश्य करना चाहिये। (अध्याय २०८)

॥ भविष्यपुराणान्तर्गत उत्तरपर्व सम्पूर्ण ॥

॥ श्रीभविष्यमहापुराण सम्पूर्ण ॥

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