भारतकोश
भविष्य पुराण

भविष्य पुराण

Bhavishya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

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  • संक्षिप्त भविष्यपुराण *

सुमन्तु मुनिने कहा—राजन्! ब्रह्माजी इस प्रकार स्त्री और पुरुषोंके लक्षणोंको स्वामिकार्तिकेयको बतलाकर अपने लोकको चले गये। (अध्याय २८)

विनायक-पूजाका माहात्म्य

शतानीकने कहा—मुने! अब आप मुझे भगवान् गणेशकी आराधनाके विषयमें बतलायें। गायत्री है। इसका जप करना चाहिये।

सुमन्तु मुनि बोले—राजन्! भगवान् गणेशकी आराधनामें किसी तिथि, नक्षत्र या उपवासादिकी अपेक्षा नहीं होती। जिस किसी भी दिन श्रद्धा-भक्तिपूर्वक भगवान् गणेशकी पूजा की जाय तो वह अभीष्ट फलोंको देनेवाली होती है। कामना-भेदसे अलग-अलग वस्तुओंसे गणपतिकी मूर्ति बनाकर उसकी पूजा करनेसे मनोवाञ्छित फलकी प्राप्ति होती है। 'महाकर्णाय१ विद्यहे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्।'—यह गणेश-

गणेशका पूजन करता है, उसके सभी कार्य सिद्ध हो जाते हैं और सभी अनिष्ट दूर हो जाते हैं। श्रीगणेशजीके अनुकूल होनेसे सभी जगत् अनुकूल हो जाता है। जिसपर एकदन्त भगवान् गणपति संतुष्ट होते हैं, उसपर देवता, पितर, मनुष्य आदि सभी प्रसन्न रहते हैं२। इसलिये सम्पूर्ण विघ्नोंको निवृत्त करनेके लिये श्रद्धा-भक्तिपूर्वक गणेशजीकी आराधना करनी चाहिये।

(अध्याय २९-३०)

चतुर्थी-कल्पमें शिवा, शान्ता तथा सुखा—तीन प्रकारकी

चतुर्थीका फल और उनका व्रत-विधान

सुमन्तु मुनिने कहा—राजन्! चतुर्थी तिथि तीन प्रकारकी होती है—शिवा, शान्ता और सुखा। अब मैं इनका लक्षण कहता हूँ, उसे सुनें—

भाद्रपद मासकी शुक्ला चतुर्थीका नाम 'शिवा' है, इस दिन जो स्नान, दान, उपवास, जप आदि सत्कर्म किया जाता है, वह गणपतिके प्रसादसे सौ गुना हो जाता है। इस चतुर्थीको गुड़, लवण और घृतका दान करना चाहिये, यह शुभकर माना गया है और गुड़के अपूर्णों (मालपूआ)—से ब्राह्मणोंको भोजन कराना चाहिये तथा उनकी पूजा करनी चाहिये। इस दिन जो स्त्री अपने सास और ससुरको गुड़के पूए तथा नमकीन पूए

खिलाती है वह गणपतिके अनुग्रहसे सौभाग्यवती होती है। पतिकी कामना करनेवाली कन्या विशेषरूपसे इस चतुर्थीका व्रत करे और गणेशजीकी पूजा करे। राजन्! यह शिवा-चतुर्थीका विधान है।

माघ मासकी शुक्ला चतुर्थीको 'शान्ता' कहते हैं। यह शान्ता तिथि नित्य शान्ति प्रदान करनेके कारण 'शान्ता' कही गयी है। इस दिन किये हुए स्नान-दानादि सत्कर्म गणेशजीकी कृपासे हजार गुना फलदायक हो जाते हैं। इस शान्ता नामक चतुर्थी तिथिको उपवास कर गणेशजीका पूजन तथा हवन करे और लवण, गुड़, शाक एवं गुड़के पूए ब्राह्मणोंको दानमें दे। विशेषरूपसे

१-परम्परासे प्रचलित गणेश-गायत्रीमें 'एकदन्ताय' पाठ है।

२-एकदन्ते जगन्नाथे गणेशे तुष्टिमागते। पितृदेवमनुष्याद्याः सर्वे तुष्यन्ति भारत ॥ (ब्राह्मपर्व ३०।८)

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