भविष्य पुराण
Bhavishya Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 79, कुल 654 में से
संदर्भ में पढ़ें६८
- संक्षिप्त भविष्यपुराण *
निर्विष सर्प होता है और जिसके माता-पिता आदि सर्पके काटनेसे मरते हैं, वह उनकी सद्गतिके लिये भाद्रपदके शुक्ल पक्षकी पञ्चमी तिथिको उपवास कर नागोंकी पूजा करे१। यह तिथि महापुण्या कही गयी है। इस प्रकार बारह महीनेतक चतुर्थी तिथिके दिन एक बार भोजन करना चाहिये और पञ्चमीको व्रत कर नागोंकी पूजा करनी चाहिये। पृथ्वीपर नागोंका चित्र अङ्कित कर अथवा सोना, काष्ठ या मिट्टीका नाग बनाकर पञ्चमीके दिन करवीर, कमल, चमेली आदि पुष्प, गन्ध, धूप और विविध नैवेद्योंसे उनकी पूजा कर घी, खीर, और लड्डू उत्तम पाँच ब्राह्मणोंको खिलाये। अनन्त, वासुकि, शंख, पद्म, कम्बल, कर्कोटक, अश्चर, धृतराष्ट्र, शंखपाल, कालिय, तक्षक और पिंगल—इन बारह नागोंकी बारह महीनोंमें क्रमशः पूजा करे।
इस प्रकार वर्षपर्यन्त व्रत एवं पूजनकर व्रतकी
पारणा करनी चाहिये। बहुत-से ब्राह्मणोंको भोजन कराना चाहिये। विद्वान् ब्राह्मणको सोनेका नाग बनाकर उसे देना चाहिये। यह उद्यापनकी विधि है। राजन् आपके पिता जनमेजयने भी अपने पिता परीक्षितके उद्धारके लिये यह व्रत किया था और सोनेका बहुत भारी नाग तथा अनेक गौण्ड ब्राह्मणोंको दी थीं। ऐसा करनेपर वे पितृ-ऋणसे मुक्त हुए थे और परीक्षितने भी उत्तम लोकको प्राप्त किया था। आप भी इसी प्रकार सोनेका नाग बनाकर उनकी पूजा कर उन्हें ब्राह्मणको दान करें, इससे आप भी पितृ-ऋणसे मुक्त हो जायेंगे। राजन्! जो कोई भी इस नागपञ्चमी-व्रतको करेगा, साँपसे डँसे जानेपर भी वह शुभलोकको प्राप्त होगा और जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक इस कथाको सुनेगा, उसके कुलमें कभी भी साँपका भय नहीं होगा। इस पञ्चमी-व्रतके करनेसे उत्तम लोककी प्राप्ति होती है। (अध्याय ३२)
सर्पोंके लक्षण, स्वरूप और जाति२
राजा शतानीकने पूछा—मुने! सर्पोंके कितने रूप हैं, क्या लक्षण हैं, कितने रंग हैं और उनकी कितनी जातियाँ हैं? इसका आप वर्णन करें।
सुमन्तु मुनिने कहा—राजन्! इस विषयमें सुमेरु पर्वतपर महर्षि कश्यप और गौतमका जो संवाद हुआ था, उसका मैं वर्णन करता हूँ। महर्षि कश्यप किसी समय अपने आश्रममें बैठे थे। उस समय वहाँ उपस्थित महर्षि गौतमने उन्हें प्रणामकर विनयपूर्वक पूछा—महाराज! सर्पोंके लक्षण, जाति, वर्ण और स्वभाव किस प्रकारके हैं, उनका आप वर्णन करें तथा उनकी उत्पत्ति
किस प्रकार हुई है यह भी बतायें। वे विष किस प्रकार छोड़ते हैं, विषके कितने वेग हैं, विषकी कितनी नाड़ियाँ हैं, साँपोंके दाँत कितने प्रकारके होते हैं, सर्पिणीको गर्भ कब होता है और वह कितने दिनोंमें प्रसव करती है, स्त्री-पुरुष और नपुंसक सर्पका क्या लक्षण है, ये क्यों काटते हैं, इन सब बातोंको आप कृपाकर मुझे बतायें।
कश्यपजी बोले—मुने! आप ध्यान देकर सुनें। मैं सर्पोंके सभी भेदोंका वर्णन करता हूँ। ज्येष्ठ और आषाढ़ मासमें सर्पोंको मद होता है। उस समय वे मैथुन करते हैं। वर्षा-ऋतुके चार महीनेतक
१-वर्तमानमें नागपञ्चमी प्रायः सभी पञ्चाङ्गों तथा व्रतके निबन्ध-ग्रन्थोंके अनुसार श्रावण शुक्ल पञ्चमीको होती है। यहाँ या लो पाठ अशुद्ध है या कालान्तरमें कभी भाद्रपदमें नागपञ्चमी मनायी जाती रही होगी।
२-शिवतत्त्व-रत्नाकर और अभिलषितार्थ-चिन्तामणि तथा आयुर्वेद-ग्रन्थों—सुश्रुत, चरक, वाग्भटके चिकित्साख्यानोंमें भी इस विषयका वर्णन मिलता है।
In Public Domain. Digitized by Sarvagya Sharada Peeth 584 Sankshipta Bhavishya Puran_Section_4_2_Bach