भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

पृष्ठ 178, कुल 638 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 178

१८६ 'मिथुन' लग्न की कुण्डली के 'पंचमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश मिथुन लग्न : पंचमभाव : बुध [कुण्डली ३७४ : मिथुन लग्न, पंचम भाव (तुला राशि) में बुध] पाँचवें भाव में मित्र शुक्र की राशि पर स्थित बुध के प्रभाव से जातक को विद्या-बुद्धि एवं सन्तान का श्रेष्ठ लाभ होता है और वह बड़ा गंभीर, चतुर तथा आत्मविश्वासी होता है। सातवीं मित्रदृष्टि से एकादश भाव को देखने के कारण बुद्धि-बल से पर्याप्त लाभ होता रहता है। साथ ही माता, भूमि एवं भवन का सुख भी प्राप्त होता है। ऐसा व्यक्ति शान्ति-प्रिय स्वभाव का होता है। 'मिथुन' लग्न को कुण्डली के 'षष्ठभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश मिथुन लग्न : षष्ठभाव : बुध [कुण्डली ३७५ : मिथुन लग्न, षष्ठ भाव (वृश्चिक राशि) में बुध] छठे भाव में मित्र मंगल की राशि पर स्थित