भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

पृष्ठ 179, कुल 638 में से

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१८७ 'मिथुन' लग्न की कुण्डली के 'अष्टमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश मिथुन लग्न : अष्टमभाव : बुध आठवें भाव में मित्र शनि की राशि पर स्थित बुध के प्रभाव से जातक को आयु तथा पुरातत्त्व का लाभ होता है, पर माता, भूमि तथा भवन के सुख में कमी रहती है। शारीरिक सौन्दर्य एवं स्वास्थ्य की भी हानि होती है। ऐसे व्यक्ति को अपने जन्म-स्थान से हट कर परदेश में जाकर रहना पड़ता है। सातवी मित्रदृष्टि से द्वितीयभाव को देखने के कारण प्रयत्नपूर्वक धन एवं कुटुम्ब के सुख का लाभ होता है, परन्तु शारीरिक सुख में कमी रहती है तथा परेशानियां भी उठानी पड़ती हैं। 'मिथुन' जन्म की कुण्डली के 'नवमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश मिथुन लग्न : नवमभाव : बुध नवें भाव में मित्र शनि की राशि पर स्थित' बुध के प्रभाव से जातक अपने शारीरिक परिश्रम तथा विवेक द्वारा धर्म एवं भाग्य की उन्नति करता है। उसे माता, भूमि तथा भवन का सुख भी प्राप्त होता है। सातवीं मित्र दृष्टि से तृतीय भाव को देखने के कारण जातक के पराक्रम में वृद्धि होती है तथा भाई-बहिन का अच्छा सुख भी मिलता है। ऐसा व्यक्ति धनी, सुखी, यशस्वी, सन्तुष्ट तथा विवेकी होता है। 'मिथुन' लग्न की कुण्डली के 'दशमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश मिथुन लग्न : दशमभाव : बुध दसवें भाव में स्थित नीच के बुध के प्रभाव से जातक को अपनी उन्नति के लिए कठोर शारीरिक श्रम करना पड़ता है। पिता का अल्प- सुख मिलता है तथा राज्य के क्षेत्र में भी अधिक सफलता नहीं मिलती। सातवी उच्चदृष्टि से प्रथमभाव को देखने के कारण शारीरिक स्वास्थ्य और सुख के सातवीं में वृद्धि होती है। ऐसा व्यक्ति कभी अपमानित और कभी सम्मानित होता रहता है।

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