भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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२०८ 'मिथुन' लग्न की कुण्डली के 'एकादशभाव' स्थित 'केतु' का फलादेश मिथुन लग्न : एकादशभाव : केतु ग्यारहवें भाव में शत्रु मंगल की राशि पर स्थित केतु के प्रभाव से जातक की आमदनी के क्षेत्र में कठिन परिश्रम करना पड़ता है तथा कभी-कभी घोर संकटों का सामना भी करना पड़ता है। अपने धैर्य, साहस तथा परिश्रम से ही उसे अन्त में कठिनाइयों पर विजय तथा आमदनी के क्षेत्र में थोड़ी-बहुत सफलता मिलती है। 'मिथुन' लग्न की कुण्डली के 'द्वादशभाव' स्थित 'केतु' का फलादेश मिथुन लग्न : द्वादशभाव : केतु बारहवें भाव में मित्र शुक्र की राशि पर स्थित केतु के प्रभाव से जातक का खर्च अधिक रहता है, जिसके कारण उसे कभी-कभी भारी संकटों का सामना करना पड़ता है। बाहरी स्थानों के सम्बन्ध से भी उसे कुछ परेशानी बनी रहती है। परन्तु ऐसा जातक अपनी हिम्मत, गुप्त युक्ति, परिश्रम तथा चतुराई के बल पर येन-केन-प्रकारेण अपना खर्च चलाता रहता है।