भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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२१० 'कर्क' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न दालों में स्थित विभिन्न ग्रहों का स्थायी फलादेश आगे दी गई उदाहरण-कुण्डली संख्या ४४३ से ५५० के बीच देखना चाहिए। गोचर-कुण्डली के ग्रहों का फलादेश किन उदाहरण-कुण्डलियों में देखें, इसे आगे लिखे अनुसार समझ लेना चाहिए। 'कर्क' लग्न में 'सूर्य' का फलादेश १—'कर्क' लग्न वालों की अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'सूर्य' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ४४३ से ४५४ के बीच देखना चाहिए। २—'कर्क' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'सूर्य' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस महीने में सूर्य— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या ४४३ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या ४४४ (ग) 'मिथुन' राशि पर ही तो संख्या ४४५ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या ४४६ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या ४४७ (च) 'कन्या' राशि पर ही तो संख्या ४४८ (छ) 'तुला' राशि पर हो की संख्या ४४९ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या ४५० (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या ४५१ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या ४५२ (ट) 'कुम्भ' राशि पर ही तो संख्या ४५३ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या ४५४ 'कर्क' लग्न में 'चन्द्रमा' का फलादेश १—'कर्क' लग्न वालों की अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'चन्द्रमा' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ४५५ से ४६६ के बीच देखना चाहिए। २—'कर्क' लग्न वालों की गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित