भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

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२५१ 'कर्क' लग्न की कुण्डली के 'एकादशभाव' स्थित 'केतु' का फलादेश कर्क लग्न : एकादशभाव : केतु ग्यारहवें भाव में मित्र शुक्र की राशि पर स्थित केतु के प्रभाव से जातक आर्थिक लाभ पाने के लिए कठोर परिश्रम करता है तथा परिश्रम, चतुराई एवं गुप्त युक्तियों के बल पर लाभ में वृद्धि भी करता है। ऐसे व्यक्ति को बारम्बार संकटों का सामना करना पड़ता है, परन्तु वह कभी हिम्मत नहीं हारता तथा परिश्रम से भी नहीं चुराता। 'कर्क' लग्न की कुण्डली के 'द्वादशभाव' स्थित 'केतु' का फलादेश कर्क लग्न : द्वादशभाव : केतु बारहवें भाव में मित्र बुध की राशि पर स्थित केतु के प्रभाव से जातक को खर्च के बारे में बहुत परेशानी उठानी पड़ती है तथा बाहरी स्थानों के सम्बन्धों से भी कष्ट ही मिलता है। ऐसा जातक गुप्त युक्तियों से काम लेनेवाला, परिश्रमी तथा भीतर-ही-भीतर दुःखी रहने वाला होता है। 'कर्क' लग्न समाप्त