भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२५३ जहाँ आलसी भी पाया जाता है, परन्तु समय पड़ने पर यह अपना कमाल प्रदर्शित कर दिखाता है। 'सिंह' लग्न वालों के अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित विभिन्न ग्रहों का स्थायी फलादेश वाले दी गई उदाहरण कुण्डली संख्या ५५२ से ६५६ के बीच देखना चाहिए। गोचर-कुण्डली के ग्रहों का फलादेश किन उदाहरण-कुण्डलियों में देखें, इसे आगे लिखे अनुसार समझ लेना चाहिए। ❦ 'सिंह' लग्न में 'सूर्य' का फलादेश १. 'सिंह' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'सूर्य' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ५५२ से ५६३ के बीच देखना चाहिए। २. 'सिंह' लग्न वालों की गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'सूर्य' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस महीने में 'सूर्य'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या ५५२ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या ५५३ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या ५५४ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या ५५५ (च) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या ५५६ (छ) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या ५५७ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या ५५८ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या ५५६ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या ५६० (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या ५६१ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या ५६२ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या ५६३ 'सिंह' लग्न में 'चन्द्रमा' का फलादेश १. 'सिंह' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'चन्द्रमा' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ५६४ से ५७५ के बीच देखना चाहिए।