भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

पृष्ठ 25, कुल 638 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 25

३० धनु एवं मीन—इन दोनों राशियों का स्वामी 'बृहस्पति' है । ९ १२ मकर एवं कुम्भ—इन दोनों राशियों का स्वामी 'शनि' है । १० ११ टिप्पणी—राहु तथा केतु छाया-ग्रह होने के कारण किसी राशि के स्वामी नहीं माने जाते, परन्तु कुछ ज्योतिर्विद बुध की राशि 'कन्या' पर 'राहु' तथा 'मिथुन' पर 'केतु' का भी आधिपत्य स्वीकार करते हैं।

राशीश बोधक चक्र

राशिस्वामीराशिस्वामी
१. मेषमंगल७. तुलाशुक्र
२. वृषशुक्र८. वृश्चिकमंगल
३. मिथुनबुध/केतु९. धनुबृहस्पति
४. कर्कचन्द्रमा१०. मकरशनि
५. सिंहसूर्य११. कुम्भशनि
६. कन्याबुध/राहु१२. मीनबृहस्पति

ग्रहों का राशि-भोग काल

भ-चक्र में सभी ग्रह क्रमशः सभी राशियों में विचरण करते हैं। कौनसा ग्रह एक राशि में कितने समय तक ठहरता है, इसे निम्नानुसार समझना चाहिए—

ग्रह का नामएक राशि पर ठहरने की अवधिग्रह का नामएक राशि पर ठहरने की अवधि
१. सूर्यएक मास६. शुक्रपौन मास
२. चन्द्रसवा दो दिन७. शनिढाई वर्ष
३. मंगलडेढ़ मास८. राहुडेढ़ वर्ष
४. बुधपौन मास९. केतुडेढ़ वर्ष
५. बृहस्पतितेरह मास
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक) · पृष्ठ 25, कुल 638 में से · BharatKosha