भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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२६४ 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'पंचमभाव' स्थित 'चन्द्रमा' का फलादेश सिंह लग्न : पंचमभाव : चन्द्र पाँचवें भाव में मित्र गुरु की राशि पर स्थित चन्द्रमा के प्रभाव से जातक को सन्तान तथा विद्या- बुद्धि के क्षेत्र में बाधाएं रहती हैं। खर्च की चिन्ता से मस्तिष्क परेशान भी रहता है ! सातवीं मित्रदृष्टि से एकादशभाव को देखने से जातक बुद्धि-बल से आमदनी के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है, परन्तु उसे कुछ असन्तोष भी बना रहता है । 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'षष्ठभाव' स्थित 'चन्द्रमा' का फलादेश सिंह लग्न : षष्ठभाव : चन्द्र छठे भाव में शत्रु शनि की राशि पर स्थित चन्द्रमा के प्रभाव से जातक को शत्रु-पक्ष द्वारा उत्पन्न झगड़ों तथा रोग आदि में खर्च अधिक करना पड़ता है, जिससे मन दुःखी बना रहता है। सातवीं दृष्टि से स्वराशि में द्वादशभाव को देखने से बाहरी स्थानों के सम्बन्ध से लाभ होता है तथा आय कम रहते हुए भी अधिक खर्च होता है। वह खर्च के द्वारा ही शत्रु-पक्ष में सफलता भी पाता है। 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'सप्तमभाव' स्थित 'चन्द्रमा' का फलादेश सिंह लग्न : सप्तमभाव : चन्द्र सातवें भाव में शत्रु शनि की राशि पर स्थित चन्द्रमा के प्रभाव से जातक को स्त्री तथा व्यवसाय के क्षेत्र में हानि उठानी पड़ती है तथा घरेलू खर्च चलाने में कठिनाई आती है। बाहरी स्थानों के सम्पर्क से लाभ होता है। सातवीं मित्रदृष्टि से प्रथमभाव को देखने के कारण शरीर दुर्बल तथा रहता है।