भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

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२७१ 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'द्वितीयभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश सिंह लग्न : द्वितीयभाव : बुध दूसरे भाव में स्वराशि स्थित उच्च के बुध के प्रभाव से जातक के धन तथा कौटुम्बिक सुख की वृद्धि होती है। भाई-बहिनों का यथेष्ट सुख भी मिलता है। सातवीं नीच-दृष्टि से अष्टमभाव को देखने से आयु तथा पुरातत्त्व के बारे में अनेक संकटों तथा चिन्ताओं का शिकार बनना पड़ता है। पेट की बीमारी रहती है तथा दैनिक जीवन भी असन्तोषजनक बना रहता है। 'सिंह' लग्न की कुण्डली से 'तृतीयभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश सिंह लग्न : तृतीयभाव : बुध तीसरे भाव में मित्र शुक्र की राशि पर स्थित बुध के प्रभाव से जातक का पराक्रम बढ़ता है तथा भाई-बहिनों का सुख भी मिलता है। सातवीं मित्र-दृष्टि से नवमभाव को देखने से भाग्य की उन्नति होती है तथा धर्म का पालन भी होता है। ऐसा व्यक्ति धनी, धर्मात्मा, पराक्रमी, यशस्वी तथा सुखी होता है। 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'चतुर्थभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश सिंह लग्न : चतुर्थभाव : बुध चौथे भाव में मित्र मंगल की राशि पर स्थित बुध के प्रभाव से जातक की माता, भूमि तथा भवन का पर्याप्त सुख मिलता है तथा धन का संचय होता है। सातवीं मित्र-दृष्टि से दशमभाव को देखने से राज्य, व्यवसाय तथा पिता के क्षेत्र में सुख, सम्मान तथा लाभ मिलता है।