भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२७२ 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'पंचमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश सिंह लग्न : पंचमभाव : बुध पाँचवें भाव में मित्र गुरु की राशि पर स्थित बुध के प्रभाव से जातक को विद्या, बुद्धि तथा सन्तान के क्षेत्र में पर्याप्त सफलता मिलती है। साथ ही, धन की उन्नति भी होती है। सातवीं दृष्टि से स्वराशि के एकादशभाव को देखने से आमदनी बहुत अच्छी रहती है। ऐसा जातक धनी, सुखी, विद्वान्, सज्जन तथा स्वार्थी होता है। 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'षष्ठभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश सिंह लग्न : षष्ठभाव : बुध छठे भाव में मित्र शनि की राशि पर स्थित बुध के प्रभाव से जातक शत्रु-पक्ष में नम्रता एवं धन की शक्ति से सफलता प्राप्त करता है। सातवीं मित्र-दृष्टि से द्वादशभाव में देखने से खर्च अधिक होता है तथा बाहरी स्थानों के सम्बन्ध से लाभ मिलता है। कौटुम्बिक सुख की प्राप्ति कम ही होती है। 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'सप्तमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश सिंह लग्न : सप्तमभाव : बुध सातवें भाव में मित्र शनि की राशि पर स्थित बुध के प्रभाव से जातक को सुन्दर स्त्री मिलती है तथा व्यवसाय के क्षेत्र में भी लाभ होता है। धन तथा कुटुम्ब का सुख भी मिलता है। सातवीं मित्र-दृष्टि से प्रथमभाव को देखने से जातक के शारीरिक सौन्दर्य, आत्मिक बल, विवेक तथा यश की वृद्धि होती है।