भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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२७३ 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'अष्टमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश सिंह लग्न : अष्टमभाव : बुध आठवें भाव में मित्र गुरु की राशि पर स्थित नीच के बुध के प्रभाव से जातक की आयु-पक्ष में संकटों का सामना करना पड़ता है तथा पुरातत्त्व की हानि भी होती है। सातवीं उच्च दृष्टि से स्वराशि में द्वितीयभाव को देखने से धन की कमी रहते हुए भी दैनिक खर्च की पूर्ति होती है तथा कौटुम्बिक सुख चिन्तनीय रहता है। 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'नवमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश सिंहलग्न : नवमभाव : बुध नवें भाव में मित्र मंगल की राशि पर स्थित बुध के प्रभाव से जातक के भाग्य तथा धर्म की उन्नति होती है। वह धनी, सुखी, ईमानदार, उदार, सज्जन तथा ईश्वर-भक्त होता है। सातवीं मित्र-दृष्टि से तृतीयभाव को देखने से पराक्रम में वृद्धि होती है तथा भाई-बहिनों का सुख भी मिलता है। ऐसा जातक बड़ा यशस्वी होता है तथा निरन्तर उन्नति करता रहता है ! 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'दशमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश सिंह लग्न : दशमभाव : बुध दसवें भाव में मित्र शुक्र की राशि पर स्थित बुध के प्रभाव से जातक को पिता, राज्य व्यवसाय के क्षेत्र में पर्याप्त सफलताएँ मिलती हैं तथा धन तथा प्रतिष्ठा प्राप्त होती है। सातवीं मित्र-दृष्टि से चतुर्थभाव को देखने से माता, भूमि तथा मकान आदि का सुख भी मिलता है।