भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

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२७४ 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'एकादशभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश सिंह लग्न : एकादशभाव : बुध ग्यारहवें भाव में स्वराशि-स्थित बुध के प्रभाव से जातक को यथेष्ट लाभ होता है तथा धन, यश एवं सुख की वृद्धि होती रहती है। सातवीं मित्र-दृष्टि से पंचमभाव को देखने से सन्तान एवं विद्या-बुद्धि के क्षेत्र में भी सफलता प्राप्त होती है। ऐसा व्यक्ति धनी, सुखी, यशस्वी, विद्वान् तथा सन्ततिवान् होता है। 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'द्वादशभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश सिंह लग्न : द्वादशभाव : बुध बारहवें भाव में शत्रु चन्द्रमा की राशि पर स्थित बुध के प्रभाव से जातक का खर्च अधिक होता है, परन्तु बाहरी स्थानों के सम्बन्ध से लाभ भी होता है। सातवीं मित्र-दृष्टि से षष्ठभाव को देखने से शत्रु-पक्ष से धन तथा विवेक द्वारा सफलता प्राप्त होती है, परन्तु झगड़े-टंटों के कारण उसे हानि भी उठानी पड़ती है। [L18