भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२९७ 'कन्या' लग्न में 'बुध' का फलादेश १—'कन्या' लग्न वालों की अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'बुध' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ६९७ से ७०८ के बीच देखना चाहिए। २—'कन्या' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'बुध' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस महीने में 'बुध'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या ६९७ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या ६९८ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या ६९९ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या ७०० (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या ७०१ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या ७०२ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या ७०३ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या ७०४ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या ७०५ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या ७०६ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या ७०७ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या ७०८ 'कन्या' लग्न में 'गुरु' का फलादेश १—'कन्या' लग्न वालों की अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'गुरु' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ७०९ से ७२० के बीच देखना चाहिए। २—'कन्या' लग्न वालों की गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'गुरु' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस वर्ष में 'गुरु'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या ७०९ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या ७१० (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या ७११