भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६८ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या ७१२ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या ७१३ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या ७१४ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या ७१५ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या ७१६ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या ७१७ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या ७१८ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या ७१६ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या ७२० 'कन्या' लग्न में 'शुक्र' का फलादेश १—'कन्या' लग्न वालों की अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शुक्र' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुंडली संख्या ७२१ से ७३२ के बीच देखना चाहिए । २—'कन्या' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'गुरु' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस महीने में 'शुक्र'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या ७२१ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या ७२२ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या ७२३ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या ७२४ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या ७२५ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या ७२६ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या ७२७ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या ७२८ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या ७२९ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या ७३० (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या ७३१ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या ७३२ 'कन्या' लग्न में 'शनि' का फलादेश १—'कन्या' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शनि' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ७३३ से ७४४ के बीच देखना चाहिए ।