भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३०७ 'कन्या' लग्न की कुण्डली में 'नवमभाव' स्थित 'चन्द्रमा' का फलादेश कन्या लग्न : नवमभाव : चन्द्र नवें भाव में सामान्य मित्र 'शुक्र' की राशि पर स्थित 'चन्द्रमा' के प्रभाव से जातक को धन का यथेष्ट लाभ होता है तथा आकस्मिक दैवी सहायताएँ भी मिलती रहती हैं। सातवीं नीच-दृष्टि से तृतीयभाव को देखने से भाई-बहिनों के सुख में कुछ कमी आती है तथा पराक्रम की भी अधिक वृद्धि नहीं हो पाती। 'कन्या' लग्न की कुण्डली में 'दशमभाव' स्थित 'चन्द्रमा' का फलादेश कन्या लग्न : दशमभाव : चन्द्र दसवें भाव में मित्र 'बुध' की राशि पर स्थित 'चन्द्रमा' के प्रभाव से जातक को राज्य, पिता एवं व्यवसाय के पक्ष से पूर्ण लाभ तथा सम्मान मिलता है। ऐसा व्यक्ति धनी, सुखी तथा यशस्वी होता है। सातवीं मित्रदृष्टि से चतुर्थभाव को देखने से भूमि, भवन तथा माता का सुख भी पर्याप्त मिलता है। 'कन्या' लग्न की कुण्डली में 'एकादशभाव' स्थित 'चन्द्रमा' का फलादेश कन्या लग्न : एकादशभाव : 'चन्द्र ग्यारहवें भाव में स्वराशिस्थित चन्द्रमा के प्रभाव से जातक की आमदनी अच्छी रहती है और वह अपने मनोबल द्वारा पर्याप्त धन कमाता है। सातवीं शत्रुदृष्टि से पंचमभाव को देखने से विद्या में कमी रहती है तथा सन्तानों से वैमनस्य रहता है, परन्तु वह अपनी चतुराई द्वारा अन्य क्षेत्रों में उन्नति करता रहता है।