भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

पृष्ठ 30, कुल 638 में से

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३५ इस भाव में मेष, वृष तथा सिंह राशियां, धनु राशि का उत्तरार्द्ध तथा मकर राशि का पूर्वार्द्ध बलवान होता है । इस भाव के कारक सूर्य, बुध, बुध तथा शनि हैं । (११) ग्यारहवां भाव— इसे एकादश, लाभ, आय, उपचय, पणफर आदि नामों से भी पुकारा जाता है । इसके द्वारा जातक की आय, सम्पत्ति, ऐश्वर्य, रत्न, वाहन, मांगलिक-कार्य आदि के सम्बन्ध में विचार किया जाता है । इस भाव का कारक 'गुरु' है । (१२) बारहवां भाव— इसे द्वादश, व्यय, त्रिक आदि नामों से भी पुकारा जाता है । इसके द्वारा जातक के व्यय, व्यसन, दान, बाहरी-सम्बन्ध, यात्रा, रोग, दण्ड, हानि आदि के सम्बन्ध में विचार किया जाता है । इस भाव का कारक 'शनि' है । विभिन्न नामों से प्रमुख विचारणीय विषय निम्नांकित कुण्डली चक्र में प्रदर्शित हैं :— विभिन्न भावों के विचारणीय विषय

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|  तीसरा भाव:     |   दूसरा भाव:    |      पहला भाव:     |  बारहवाँ भाव:   |
|  सहोदर, धैर्य,  |   धन, कुटुम्ब   |  शरीर, आकृति,      |  व्यय, हानि,    |
|  पराक्रम        |                 |  मस्तिष्क, जाति,    |  दण्ड           |
|-----------------+-----------------+  आयु, विवेक, शील   +-----------------|
|                 चौथा भाव:         |                    |   ग्यारहवाँ भाव:|
|   माता, सुख, भूमि, भवन, सवारी,    +--------------------+   आय, लाभ,      |
|   सम्पत्ति, दया, दान              |     दसवाँ भाव:     |   सम्पत्ति      |
|-----------------+-----------------+  राज्य, पिता, कर्म,+-----------------|
|  पाँचवाँ भाव:   |    छठा भाव:     |  व्यवसाय, नौकरी,   |   नवॉँ भाव:     |
|  सन्तान, बुद्धि,|  शत्रु, रोग,    |  अधिकार, यश        |   धर्म, भाग्य,  |
|  विद्या         |  चिन्ता, मामा,  +--------------------+   तीर्थ, दान    |
|                 |  कष्ट           |     सातवाँ भाव:    +-----------------|
|                 |                 | स्त्री, विवाह,     |   आठवाँ भाव:    |
|                 |                 | प्रेम, दैनिक आय,   |   जीवन, मृत्यु, |
|                 |                 | स्वास्थ्य, मित्र,  |   पुरातत्त्व,   |
|                 |                 | झगड़े              |   ऋण, संकट      |
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विभिन्न भाव के कारक ग्रहों को आगे दिए गए कुण्डलीचक्र में प्रदर्शित किया गया है—