भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

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३६ विभिन्न भावों के कारक

| द्वितीय | प्रथम | द्वादश | | | सूर्य | शनि | | तृतीय | चतुर्थ | एकादश | | | चन्द्र, बुध | गुरु | | | दशम | | | | सूर्य, बुध, गुरु,| | | | शनि | | | पंचम | सप्तम | नवम | | गुरु | षष्ठ | सूर्य, गुरु | | | शनि, मंगल | अष्टम: शनि | ---------------------------------------------------- ५ भावों की त्रिकोण, केन्द्रादि संज्ञा भावों की (१) त्रिकोण, (२) केन्द्र, (३) पणफर, (४) आपोक्लिम तथा (५) मारक—ये पांच विशिष्ट संज्ञाएँ भी हैं, इनके विषय में नीचे लिखे अनुसार समझना चाहिए— (१) त्रिकोण—पांचवें तथा नवें भाव को 'त्रिकोण' कहते हैं। (२) केन्द्र