भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
पृष्ठ 32, कुल 638 में से
संदर्भ में पढ़ें३७ त्रिकोणादि बोधक चक्र २ पणफर, मारक (आपोक्लिम) | १२ आपोक्लिम ३ आपोक्लिम | १ केन्द्र | ११ पणफर (आपोक्लिम) ४ केन्द्र | १० केन्द्र (पणफर) ५ त्रिकोण पणफर | ७ केन्द्र मारक | ९ त्रिकोण आपोक्लिम ६ आपोक्लिम (पणफर) | ८ पणफर ६ टिप्पणी—मतान्तरों को कुण्डली चक्र के कोष्ठकों में प्रदर्शित किया गया है। मूल त्रिकोण निम्नानुसार जो ग्रह जिस राशि से जितने अंश पर हो उसे सुख त्रिकोण-स्थित समझना चाहिए— १. सूर्य—सिंह राशि में १ से २० अंश तक। २. चन्द्र—वृष राशि में ४ से ३० अंश तक। ३. मंगल—मेष राशि में १ से १८ अंश तक। ४. बुध—कन्या राशि में १ से १५ अंश तक। ५. गुरु—धनु राशि में १ से १३ अंश तक। ६. शुक्र—तुला राशि में १ से १० अंश तक। ७. शनि—कुम्भ राशि में १ से २० अंश तक। टिप्पणी—राहु को कर्क राशि में तथा केतु को मकर राशि में मूल त्रिकोण गत माना जाता है।