भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३११ 'कन्या' लग्न की कुण्डली में 'नवमभाव' स्थित 'मंगल' का फलादेश कन्या लग्न : नवमभाव : मंगल नवें भाव में शत्रु 'शुक्र' की राशि पर स्थित अष्टमेश 'मंगल' के प्रभाव से जातक के भाग्य तथा धर्म के पक्ष में कुछ कमी आती है तथा आयु एवं पुरातत्त्व की वृद्धि होती है। चौथी मित्रदृष्टि से द्वादशभाव को देखने से बाहरी स्थानों के सम्बन्ध से लाभ होता है तथा खर्च अधिक रहता है। सातवीं दृष्टि से स्वराशि वाले तृतीय भाव को देखने से पराक्रम की वृद्धि होती है तथा कुछ कठिनाइयों के साथ भाई-बहिनों का सुख मिलता है। आठवीं मित्र दृष्टि से चतुर्थ भाव को देखने से कुछ कमी के साथ माता, भूमि एवं भवन का सुख भी प्राप्त होत है। सामान्यतः जीवन शानदार बना रहता है। 'कन्या' लग्न की कुण्डली में 'दशमभाव' स्थित 'मंगल' का फलादेश कन्या लग्न : दशमभाव : मंगल दसवें भाव में शत्रु 'बुध' की राशि पर स्थित 'मंगल' के प्रभाव से जातक को कुछ कठिनाइयों के साथ पिता, राज्य तथा व्यवसाय के क्षेत्र में सफलता मिलती है। आयु तथा पुरातत्त्व का लाभ भी होत है, परन्तु भाई-बहिनों के सुख में कुछ कमी रहती है। चौथी शत्रुदृष्टि से प्रथमभाव को देखने से शरीर विकार-ग्रस्त रहता है, जब कि हिम्मत बढ़ी रहती है। सातवीं मित्रदृष्टि से चतुर्थभाव को देखने से माता, भूमि एवं भवन का सुख कुछ कमी के साथ मिलता है। आठवीं उच्चदृष्टि से पञ्चमभाव को देखने से सन्तान-पक्ष में कुछ कमी के साथ सफलता मिलती है तथा विद्या-बुद्धि की पर्याप्त वृद्धि होती है। 'कन्या' लग्न की कुण्डली में 'एकादशभाव' स्थित 'मंगल' का फलादेश कन्या लग्न : एकादशभाव : मंगल ग्यारहवें भाव में मित्र 'चन्द्रमा' की राशि पर स्थित 'मंगल' के प्रभाव से जातक को लाभ के क्षेत्र में कुछ कठिनाई आती है, परन्तु आयु एवं पुरातत्त्व का लाभ होता है। चौथी शत्रुदृष्टि से द्वितीयभाव को देखने से धन-संचय तथा कौटुम्बिक सुख में कमी आती है। सातवीं उच्च दृष्टि से पंचमभाव को देखने से विद्या एवं बुद्धि की उन्नति होती है तथा सन्तान के पक्ष में कुछ कठिनाइयों के साथ सफलता मिलती है। आठवीं शत्रुदृष्टि से षष्ठभाव को देखने से शत्रु-पक्ष पर प्रभाव स्थापित होता है। ऐसा जातक बड़ा हिम्मती, बहुत बोलने वाला तथा बहादुर होता है।