भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३१३ 'कन्या' लग्न की कुण्डली में 'तृतीयभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश कन्या लग्न : तृतीयभाव : बुध तीसरे भाव में मित्र 'मंगल' की राशि पर स्थित 'बुध' के प्रभाव से जातक के पराक्रम तथा भाई-बहिनों के सुख में वृद्धि होती है। राज्य, व्यवसाय तथा पिता के पक्ष में भी सफलता मिलती है। सातवीं मित्रदृष्टि से नवमभाव को देखने से धर्म तथा भाग्य की उन्नति होती है। ऐसा व्यक्ति धनी, सुखी, धर्मात्मा, यशस्वी तथा प्रभावशाली होता है। 'कन्या' लग्न की कुण्डली में 'चतुर्थभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश कन्या लग्न : चतुर्थभाव : बुध चौथे भाव में मित्र 'गुरु' की राशि पर स्थित 'बुध' के प्रभाव से जातक को माता, भूमि एवं भवन का श्रेष्ठ सुख मिलता है। शारीरिक सौन्दर्य तथा सुख में भी वृद्धि होती है। सातवीं दृष्टि से स्वराशि के एकादशभाव को देखने से राज्य, पिता एवं व्यवसाय के क्षेत्र में भी सब प्रकार की सफलताएँ प्राप्त होती हैं। 'कन्या' लग्न की कुण्डली के 'पंचमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश कन्या लग्न : पंचमभाव : बुध पाँचवें भाव में मित्र 'शनि' की राशि पर स्थित 'बुध' के प्रभाव से जातक की विद्या, बुद्धि एवं सन्तान का पर्याप्त सुख मिलता है और उच्च पद की प्राप्ति होती है। सातवीं शत्रुदृष्टि से एकादशभाव को देखने के कारण आमदनी के क्षेत्र में कुछ कठिनाइयों के साथ वृद्धि होती है। पिता, राज्य तथा व्यवसाय के क्षेत्र में भी सफलताएँ मिलती हैं। ऐसा व्यक्ति सुन्दर, सुखी, धनी तथा स्वाभिमानी होता है।