भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३१४ 'कन्या' लग्न की कुण्डली में 'षष्ठभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश कन्या लग्न : षष्ठभाव : बुध छठे भाव में मित्र 'शनि' की राशि पर स्थित 'बुध' के प्रभाव से जातक को शत्रु-पक्ष में विवेक एवं युक्तियों के द्वारा सफलताएँ मिलती हैं । ननिहाल-पक्ष से भी लाभ होता है । परन्तु शारीरिक सौन्दर्य तथा पिता, राज्य एवं व्यवसाय के क्षेत्र में कुछ असन्तोष रहता है । सातवीं मित्रदृष्टि से द्वादशभाव को देखने से खर्च अधिक रहता है, परन्तु बाहरी स्थानों से अच्छा लाभ एवं सुख प्राप्त होता है । 'कन्या' लग्न की कुण्डली में 'सप्तमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश कन्या लग्न : सप्तमभाव : बुध सातवें भाव में मित्र 'गुरु' की राशि पर स्थित 'बुध' के प्रभाव से जातक अपनी पत्नी के व्यक्तित्व के समक्ष स्वयं को कुछ हीन-सा अनुभव करता है तथा दैनिक व्यवसाय के क्षेत्र में भी कठिन परिश्रम करना पड़ता है । पिता, राज्य एवं व्यवसाय के क्षेत्र में सामान्य सफलताएँ प्राप्त होती हैं । सातवीं उच्चदृष्टि से स्वराशि वाले प्रथमभाव को देखने से शारीरिक सौन्दर्य, प्रभाव एवं मानसिक सुख-शान्ति में भी कुछ कमी रहती है । 'कन्या' लग्न की कुण्डली में 'अष्टमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश कन्या लग्न : अष्टमभाव : बुध आठवें भाव में मित्र 'मंगल' की राशि पर स्थित 'बुध' के प्रभाव से जातक के शारीरिक सौन्दर्य में कमी आती है तथा पिता, राज्य एवं व्यवसाय के क्षेत्र में भी कठिनाइयाँ आती रहती हैं । बाहरी सम्बन्धों से आजीविका चलती रहती है । सातवीं मित्रदृष्टि से द्वितीयभाव को देखने के कारण गुप्त युक्तियों के आश्रय से धन की वृद्धि होती है तथा कुटुम्ब से प्रेम रहता है ।