भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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३१५ 'कन्या' लग्न की कुण्डली में 'नवमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश कन्या लग्न : नवमभाव : बुध नवें भाव में मित्र 'शुक्र' की राशि पर स्थित 'बुध' के प्रभाव से जातक के भाग्य एवं धर्म की उन्नति होती है तथा राज्य, पिता एवं व्यवसाय के क्षेत्र में भी सफलताएँ मिलती हैं । सातवीं मित्रदृष्टि से तृतीयभाव को देखने से भाई-बहिन के सुख तथा पराक्रम में वृद्धि होती है। ऐसा व्यक्ति सज्जन, सुखी, यशस्वी तथा धनी होता है। 'कन्या' लग्न की कुण्डली में 'दशमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश कन्या लग्न : दशमभाव : बुध दसवें भाव में स्वक्षेत्री 'बुध' के प्रभाव से जातक को राज्य, पिता एवं व्यवसाय के क्षेत्र में अत्यधिक सफलता, यश तथा सम्मान की प्राप्ति होती है। ऐसा व्यक्ति सुन्दर, यशस्वी, स्वाभिमानी तथा सुखी होता है। सातवीं मित्रदृष्टि से चतुर्थभाव को देखने से माता, भूमि, भवन आदि का सुख भी पर्याप्त उपलब्ध होता है। घरेलू जीवन सुख, शान्ति तथा ऐश्वर्य से पूर्ण रहता है। 'कन्या' लग्न की कुण्डली में 'एकादशभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश कन्या लग्न : एकादशभाव : बुध ग्यारहवें भाव में शत्रु 'चन्द्रमा' की राशि पर स्थित 'बुध' के प्रभाव से जातक की आमदनी अच्छी रहती है तथा पिता, राज्य एवं व्यवसाय के क्षेत्र में भी सफलताएँ प्राप्त होती हैं। शारीरिक सौन्दर्य, मनोबल एवं सुख में भी वृद्धि होती है। सातवीं मित्रदृष्टि से पञ्चमभाव को देखने से जातक को विद्या, बुद्धि एवं सन्तान के क्षेत्र में भी विशेष उन्नति प्राप्त होती है। ऐसा व्यक्ति सुखी, धनी, विद्वान् तथा ऐश्वर्यशाली होता है।