भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

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३२७ 'कन्या' लग्न की कुण्डली में 'नवमभाव' स्थित 'शनि' का फलादेश कन्यालग्न : नवमभाव : शनि नवें भाव में मित्र 'शुक्र' की राशि पर स्थित 'शनि' के प्रभाव से जातक बुद्धि-बल से भाग्योन्नति करता तथा स्वधर्म का सामान्य परिपालन करता है। संतान तथा विद्या के क्षेत्र में सफलता मिलती है। तीसरी शत्रु-दृष्टि से एकादशभाव को देखने से आमदनी के लिए विशेष प्रयत्न करना पड़ता है। सातवीं शत्रु-दृष्टि से तृतीयभाव को देखने से पराक्रम की वृद्धि होती है, परन्तु भाई-बहिनों से कुछ वैमनस्य रहता है। दसवीं दृष्टि से स्वराशि के षष्ठ- भाव को देखने से शत्रु-पक्ष में विजय मिलती है तथा झगड़ों से लाभ होता है। ऐसा व्यक्ति बड़ा चतुर, नीतिज्ञ, प्रभावशाली तथा हिम्मती होता है। 'कन्या' लग्न की कुण्डली में 'दशमभाव' स्थित 'शनि' का फलादेश कन्या लग्न : दशमभाव : शनि दसवें भाव में मित्र 'बुध' की राशि पर स्थित शनि के प्रभाव से जातक की पिता-पक्ष से परेशानी रहती है, परन्तु राज्य-पक्ष से सम्मान एवं व्यवसाय- पक्ष से लाभ होता है। विद्या तथा सन्तान का भी सुख मिलता है। तीसरी शत्रु-दृष्टि से द्वादशभाव को देखने से खर्च के मामले में असन्तोष रहता है तथा बाहरी स्थानों का सम्बन्ध भी सुखदायी नहीं रहता। सातवीं शत्रु-दृष्टि से चतुर्थभाव को देखने से माता एवं भूमि के सुख में कुछ कमी रहती है। दसवीं शत्रु-दृष्टि से सप्तमभाव को देखने से स्त्री के सुख में कमी आती है तथा दैनिक व्यवसाय के क्षेत्र में कठिन परिश्रम से ही सफलता मिलती है। 'कन्या' लग्न की कुण्डली में 'एकादशभाव' स्थित 'शनि' का फलादेश कन्या लग्न : एकादशभाव : शनि ग्यारहवें भाव में शत्रु 'चन्द्रमा' की राशि पर स्थित 'शनि' के प्रभाव से जातक की आमदनी में खूब वृद्धि होती है तथा शत्रु-पक्ष से भी लाभ होता है। तीसरी मित्र-दृष्टि से प्रथमभाव को देखने से शरीर में रोग रहता है। सातवीं दृष्टि से स्वराशि में पंचमभाव को देखने से सन्तान तथा विद्या-बुद्धि की शक्ति प्राप्त होती है। दसवीं नीच-दृष्टि से अष्टमभाव को देखने से पुरातत्त्व की हानि होती है तथा आयु पर भी अनेक संकट आते हैं।