भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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३४६ 'तुला' लग्न की कुण्डली में 'नवमभाव' स्थित 'चन्द्रमा' का फलादेश तुला लग्न : नवमभाव : चन्द्र नवें भाव में मित्र 'बुध' की राशि पर स्थित 'चन्द्रमा' के प्रभाव से जातक के धर्म तथा भाग्य की वृद्धि होती है। पिता, राज्य एवं व्यवसाय-पक्ष से भी यश, सहयोग तथा सम्मान का लाभ होता है। सातवीं मित्रदृष्टि से तृतीय भाव को देखने से भाई-बहिनों का सुख मिलता है तथा पराक्रम में वृद्धि होती है। 'तुला' लग्न की कुण्डली में 'दशमभाव स्थित 'चन्द्रमा' का फलादेश तुला लग्नः दशमभाव : चन्द्र दसवें भाव में स्वराशि-स्थित 'चन्द्रमा' के प्रभाव से जातक को पिता, राज्य तथा व्यवसाय के क्षेत्र में शक्ति, सहयोग, सम्मान, यश तथा धन का लाभ होता है। ऐसा व्यक्ति स्वाभिमानी तथा समाज में प्रतिष्ठित होता है। सातवीं शत्रुदृष्टि से चतुर्थ भाव को देखने से माता, भूमि तथा भवन का सुख कुछ कमी के साथ प्राप्त होता है। 'तुला' लग्न की कुण्डली में 'एकादशभाव' स्थित 'चन्द्रमा' का फलादेश तुलालग्न : एकादशभाव : चन्द्र ग्यारहवें भाव में मित्र 'सूर्य' की राशि में स्थित 'चन्द्रमा' के प्रभाव से जातक को लाभ के अवसर निरन्तर मिलते रहते हैं। पिता, राज्य तथा व्यवसाय के पक्ष में भी सफलता, सम्मान तथा यश आदि की यथेष्ट प्राप्ति होती है। सातवीं शत्रुदृष्टि से पंचम भाव को देखने से सन्तान के पक्ष से सामान्य असंतोष रहता है, परन्तु विद्या-बुद्धि का यथेष्ट लाभ होता है। ऐसा व्यक्ति होशियार, चालाक तथा स्वार्थी होता है।