भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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३५६ 'तुला' लग्न की कुण्डली के 'तृतीयभाव' स्थित 'गुरु' का फलादेश तुला लग्न : तृतीयभाव : गुरु तीसरे भाव में स्वराशि-स्थित 'गुरु' के प्रभाव से जातक के पराक्रम में वृद्धि होती है, परन्तु भाई-बहिनों के सुख में सामान्य कमी आती है। शत्रु-पक्ष पर प्रभाव स्थापित होता है। पाँचवीं मित्र-दृष्टि से सप्तमभाव को देखने से स्त्री तथा व्यवसाय के क्षेत्र में सफलता मिलती है। सातवीं मित्र-दृष्टि से नवमभाव को देखने से धर्म तथा भाग्य की वृद्धि होती है। नवीं मित्र-दृष्टि से एकादशभाव को देखने से आमदनी के क्षेत्र में खूब सफलता मिलती है। ऐसा व्यक्ति सुखी, धनी, धर्मात्मा तथा भाग्यशाली होता है। 'तुला' लग्न की कुण्डली से 'चतुर्थभाव' स्थित 'गुरु' का फलादेश तुला लग्न : चतुर्थभाव : गुरु चौथे भाव में शत्रु शनि की राशि पर स्थित नीच के 'गुरु' के प्रभाव से जातक को माता, भूमि तथा भवन के सुख में कमी रहती है तथा शत्रु-पक्ष में भी परेशानी उठानी पड़ती है। पाँचवीं शत्रु-दृष्टि से अष्टमभाव को देखने से आयु तथा पुरातत्त्व का कुछ लाभ होता है। सातवीं मित्र तथा उच्च-दृष्टि से दशमभाव को देखने से पिता, राज्य एवं व्यवसाय के क्षेत्र में पर्याप्त सफलता मिलती है। नवीं मित्र-दृष्टि से द्वादशभाव को देखने से खर्च अधिक रहता है तथा बाहरी स्थानों के सम्बन्ध से लाभ होता है। 'तुला' लग्न की कुण्डली के 'पंचमभाव' स्थित 'गुरु' का फलादेश तुला लग्न : पंचमभाव : गुरु पाँचवें भाव में शत्रु 'शनि' की राशि पर स्थित 'गुरु' के प्रभाव से जातक को विद्या-बुद्धि तथा सन्तान के क्षेत्र में कुछ कठिनाइयों के साथ सफलता मिलती है तथा शत्रु-पक्ष में प्रभाव बढ़ता है। भाई-बहिनों से कुछ मतभेद भी रहता है। पाँचवीं मित्रदृष्टि से नवम भाव को देखने से पुरुषार्थ द्वारा भाग्य एवं धर्म की वृद्धि होती है। सातवीं मित्र-दृष्टि से एकादशभाव को देखने से आमदनी खूब होती है। नवीं शत्रु-दृष्टि से प्रथम भाव को देखने से शारीरिक शक्ति, प्रभाव तथा बल की प्राप्ति होती है, परन्तु स्वास्थ्य में कुछ कमी बनी रहती है।