भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४१ १. सूर्य—'सिंह' राशि स्थित सूर्य स्वक्षेत्री होता है। सिंह राशि के १ से २० अंश तक उसका मूलत्रिकोण, तथा २१ से ३० अंश तक स्वक्षेत्र माना जाता है। मेष राशि के १० अंश तक उच्च का और तुला राशि के १० अंश तक नीच का होता है। २. चन्द्र—'कर्क' राशि स्थित चन्द्र स्वक्षेत्री होता है। वृष राशि के ३ अंश तक उच्च का, एवं वृष राशि के ४ से ३० अंश तक मूलत्रिकोण स्थित माना जाता है। वृश्चिक राशि के ३ अंश तक नीच का होता है। ३. मंगल—'मेष' अथवा 'वृश्चिक' राशि में स्थित मंगल स्वक्षेत्री होता है, परन्तु मेष राशि के १ से १० अंश तक मूलत्रिकोणगत तथा ११ से ३० अंश तक स्वक्षेत्री माना जाता है। मकर राशि के २८ अंश तक उच्च का तथा कर्क राशि के २८ अंश तक नीच का होता है। ४. बुध—'कन्या' अथवा 'मिथुन' राशि में स्थित बुध स्वक्षेत्री होता है, परन्तु कन्या राशि के १ से १५ अंश तक मूलत्रिकोणगत तथा १६ से ३० अंश तक स्वक्षेत्री माना जाता है। कन्या राशि के १५ अंश तक उच्च का तथा मीन राशि के १५ अंश तक नीच का होता है। इसी प्रकार कन्या राशि स्थित बुध १ से १५ अंश तक उच्च का, साथ ही १ से १५ अंश तक मूलत्रिकोणगत तथा १६ से ३० अंश तक स्वक्षेत्री माना जाता है। ५. गुरु—'धनु' अथवा 'मीन' राशि में स्थित स्वक्षेत्री होता है, परन्तु धनु राशि के १ से १३ अंश तक उसे मूलत्रिकोणगत तथा १४ से ३० अंश तक स्वक्षेत्री माना जाता है। कर्क राशि के ५ अंश तक उच्च का तथा मकर राशि के ५ अंश तक नीच का होता है। ६. शुक्र—'वृष' अथवा 'तुला' राशि स्थित शुक्र स्वक्षेत्री होता है, परन्तु तुला राशि के १ से १० अंश तक उसका मूलत्रिकोण तथा ११ से ३० अंश तक स्वक्षेत्र माना जाता है। मीन राशि के २७ अंश तक उच्च का तथा कन्या राशि के २७ अंश तक नीच का होता है। ७. शनि—'मकर' अथवा 'कुम्भ' राशि स्थित शनि स्वक्षेत्री होता है, परन्तु कुम्भ राशि के १ से २० अंश तक उसका मूलत्रिकोण तथा २१ के ३० अंश तक स्वक्षेत्र माना जाता है। तुला राशि के २० अंश तक उच्च का तथा मेष राशि के २० अंश तक नीच का होता है। ८. राहु—कन्या राशि में स्थित राहु स्वक्षेत्री होता है। मिथुन राशि के १५ अंश तक उच्च का तथा धनु राशि के १५ अंश तक नीच का माना जाता है। इसके विपरीत कुछ विद्वानों की राय में राहु वृष राशि में उच्च का तथा वृश्चिक राशि में नीच का होता है। कर्क राशि को राहु का मूल त्रिकोण माना जाता है। ९. केतु—मिथुन राशि में स्थित केतु स्वक्षेत्री होता है। धनु राशि के १५