भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

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पृष्ठ 384, कुल 638 में से

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३६३ 'वृश्चिक' लग्न की कुण्डली के 'द्वितीयभाव' स्थित 'मंगल' का फलादेश वृश्चिक लग्न : द्वितीयस्थान : मगल दूसरे भाव में मित्र 'गुरु' की राशि पर स्थित 'मंगल' के प्रभाव से जातक अपने शारीरिक श्रम द्वारा धनोपार्जन करता है तथा कुछ परेशानियों के साथ कौटुम्बिक सुख भी प्राप्त करता है। शारीरिक सुन्दरता व स्वास्थ्य में कमी रहती है किन्तु शत्रु-पक्ष पर प्रभाव बना रहता है। चौथी मित्र-दृष्टि से पंचमभाव को देखने से विद्या-बुद्धि एवं सन्तान के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। सातवीं मित्रदृष्टि से अष्टम भाव को देखने से आयु तथा पुरातत्त्व की वृद्धि होती है। आठवीं नीच-दृष्टि से नवम भाव को देखने से धर्म तथा भाग्य की हानि होती है और यश की भी कमी रहती है। 'वृश्चिक' लग्न की कुण्डली के 'तृतीयभाव' स्थित 'मंगल' का फलादेश वृश्चिक लग्न : तृतीयभाव : मंगल तीसरे भाव में शत्रु 'शनि' की राशि पर स्थित उच्च के मंगल के प्रभाव से जातक के पराक्रम में वृद्धि होती है तथा भाई-बहिनों से सामान्य वैमनस्य रहता है। चौथी दृष्टि से स्वराशि में षष्ठभाव को देखने से शत्रु-पक्ष पर विजय प्राप्त होती है। सातवीं नीच-दृष्टि से नवम भाव को देखने से धर्म का यथाविधि पालन नहीं होता तथा भाग्य की अपेक्षा पुरुषार्थ का अधिक भरोसा रखा जाता है। आठवीं मित्र-दृष्टि से दशम भाव को देखने से पिता, राज्य एवं व्यवसाय के पक्ष में सुख, सहयोग, लाभ तथा सम्मान की प्राप्ति होती है। 'वृश्चिक' लग्न की कुण्डली के 'चतुर्थभाव' स्थित 'मंगल' का फलादेश वृश्चिक लग्न : चतुर्थभाव : मंगल चौथे भाव में शत्रु 'शनि' की राशि पर स्थित 'मंगल' के प्रभाव से जातक को माता, भूमि एवं भवन के सुख में कुछ कमी रहती है। चौथी सामान्य शत्रु-दृष्टि से सप्तम भाव को देखने से स्त्री-पक्ष से सामान्य मतभेद-युक्त सुख प्राप्त होता है तथा दैनिक व्यवसाय में सफलता मिलती है। सातवीं मित्र-दृष्टि से दशम भाव को देखने से पिता, राज्य एवं व्यवसाय के क्षेत्र में सुख, सफलता, लाभ एवं यश की प्राप्ति होती है। आठवीं मित्रदृष्टि से एकादश भाव-को देखने से आमदनी बहुत अच्छी रहती है।

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