भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४२२ 'धनु' लग्न वालों के अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित विभिन्न ग्रहों का स्थायी फलादेश आगे दी गई उदाहरण-कुण्डली संख्या ६८८ से १०६५ के बीच देखना चाहिए । गोचर-कुण्डली के ग्रहों का फलादेश किन उदाहरण-कुण्डलियों में देखें, इसे आगे लिखे अनुसार समझ लेना चाहिए । 'धनु' लग्न में 'सूर्य' का फलादेश १. 'धनु' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'सूर्य' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ६८८ से ६९९ के बीच देखना चाहिए । २. 'धनु' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'सूर्य' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस महीने में 'सूर्य'— (क) 'मेष' राशि पर ही तो संख्या ६८८ (ख) 'वृष' राशि पर ही तो संख्या ६८९ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या ६९० (घ) 'कर्क' राशि पर ही तो संख्या ६९१ (च) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या ६९२ (छ) 'कन्या' राशि पर ही तो संख्या ६९३ (छ) 'तुला' राशि पर ही तो संख्या ६९४ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या ६९५ (झ) 'धनु' राशि पर ही तो संख्या ६९६ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या ६९७ (ट) .'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या ६९८ (ठ) 'मीन' राशि पर ही तो संख्या ६९९ 'धनु' लग्न में 'चन्द्रमा' का फलादेश १. 'धनु' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'चन्द्रमा' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या १००० से १०११ के बीच देखना चाहिए। २. 'धनु' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित