भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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४२१ 'धनु' लग्न

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|   १०   \      ९      /    ८   |
|         \ 'धनु' लग्न /        |
|   ११     \         /     ७    |
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|    \  १२  /       \   ६   /   |
|     \   /     ३     \   /     |
|  १   \ /             \ /  ५   |
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|          \    ४    /          |
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['धनु' लग्न की कुण्डलियों के विभिन्न भावों में स्थित विभिन्न ग्रहों के फलादेश का पृथक्-पृथक् वर्णन]

'धनु' लग्न का फलादेश

'धनु' लग्न में लग्न लेने वाला जातक पिंगलवर्ण, बड़े दाँतों वाला घोड़े-जैसी जाँघों वाला तथा सुन्दर स्वरूप वाला होता है। वह अत्यन्त कार्य-कुशल, प्रतिभा- शाली, बुद्धिमान्, सतोगुणी, श्रेष्ठ स्वभाव वाला, सत्य-प्रतिज्ञ, पराक्रमी, तथा ऐश्वर्यवान् होता है। ऐसा व्यक्ति यात्रा-प्रेमी, व्यवसायी, ब्राह्मण तथा देवताओं का भक्त, प्रेम के वश में रहने वाला, मित्रों के काम आने वाला, अनेक कलाओं का जानकार अथवा कवि तथा लेखक होता है। उसे घोड़े पालने का शौक भी होता है। 'धनु' लग्न में जन्म लेने वाला जातक बाल्यावस्था में अधिक सुख भोगता है, मध्यमावस्था में सामान्य जीवन व्यतीत करता है तथा अन्तिमावस्था में धन-धान्य पूर्ण होता है। २२ अथवा २३ वर्ष की आयु में उसे धन का विशेष लाभ होता है।