भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४७७ 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'एकादशभाव' स्थित 'चन्द्रमा' का फलादेश मकर लग्न : एकादशभाव : चंद्र ग्यारहवें भाव में मित्र 'मंगल' की राशि पर स्थित नीच के 'चन्द्रमा' के प्रभाव से जातक की आम- दनी में कुछ कमी रहती है। स्त्री तथा व्यवसाय के क्षेत्र में भी अल्प सुख मिलता है। गृहस्थी के कारण चिंताओं का शिकार बनना पड़ता है। सातवीं उच्च-दृष्टि से पंचमभाव को देखने से विद्या, बुद्धि तथा तथा सन्तान का यथेष्ट सुख प्राप्त होता है। 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'द्वादशभाव' स्थित 'चन्द्रमा' का फलादेश मकर लग्न : द्वादशभाव : चंद्र बारहवें भाव में मित्र 'गुरु' की राशि पर स्थित 'चन्द्रमा' के प्रभाव से जातक का खर्च अधिक होता है तथा बाहरी स्थानों के सम्बन्ध से लाभ होता रहता है। स्त्री-सुख में कमी रहती है तथा दैनिक व्यवसाय में भी कठिनाइयां आती रहती हैं। इसी से मन चिंतित तथा अशान्त बना रहता है। सातवीं मित्रदृष्टि से षष्ठभाव को देखने से शत्रु-पक्ष एवं झगड़े के मामलों में जातक विनम्रता से काम निकालकर अपना प्रभाव भी स्थापित करता है। 'मकर' लग्न में 'मंगल' 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'प्रथमभाव' स्थित 'मंगल' का फलादेश मकर लग्न : प्रथमभाव : मंगल पहले भाव में शत्रु 'शनि' की राशि पर स्थित उच्च के 'मंगल' के प्रभाव से जातक के शारीरिक सौन्दर्य एवं शक्ति में वृद्धि होती है। चौथी दृष्टि से स्वराशि में चतुर्थभाव को देखने से माता, भूमि एवं भवन का अच्छा सुख प्राप्त होता है। रहन-सहन ठाठ- बाट का होता है। सातवीं नीच-दृष्टि से सप्तमभाव को देखने से स्त्री तथा व्यवसाय-पक्ष में कठिनाइयां आती हैं। आठवीं मित्र-दृष्टि से अष्टमभाव को देखने से आयु तथा पुरातत्त्व की शक्ति प्राप्त होती है। ऐसा व्यक्ति सुखी, धनी तथा चतुर होता है।