भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

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४७६ 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'अष्टमभाव' स्थित 'चन्द्रमा' का फलादेश मकर लग्न : अष्टमभाव : चंद्र आठवें भाव में मित्र 'सूर्य' की राशि पर स्थित 'चन्द्रमा' के प्रभाव से जातक को आयु तथा पुरातत्त्व का यथेष्ट लाभ होता है, परन्तु स्त्री तथा व्यवसाय के क्षेत्र में कठिनाइयां आती हैं। गृहस्थी का सुख भी कम रहता है। मन में अशान्ति रहती है। सातवीं शत्रुदृष्टि से द्वितीयभाव को देखने से धन तथा कुटुम्ब का सुख कुछ कठिनाइयों के साथ प्राप्त होता है। वैसे दैनिक जीवन ठाठ-बाट का रहता है।

'मकर' लग्न की कुण्डली के 'नवमभाव' स्थित 'चन्द्रमा' का फलादेश मकर लग्न : नवमभाव : चंद्र नवें भाव में मित्र 'बुध' की राशि पर स्थित 'चन्द्रमा' के प्रभाव से जातक के भाग्य की विशेष उन्नति होती है तथा धर्म में भी अत्यधिक रुचि बनी रहती है। ऐसा व्यक्ति धनी, यशस्वी, न्यायी तथा धर्मात्मा होता है। सातवीं मित्रदृष्टि से तृतीयभाव को देखने से भाई-बहिनों से सुख तथा पराक्रम में वृद्धि होती है।

'मकर' लग्न की कुण्डली के 'दशमभाव' स्थित 'चन्द्रमा' का फलादेश मकर लग्न : दशमभाव : चंद्र दसवें भाव में सामान्य मित्र 'शुक्र' की राशि पर स्थित 'चन्द्रमा' के प्रभाव से जातक को पिता द्वारा सहयोग, राज्य से प्रतिष्ठा तथा व्यवसाय से लाभ की प्राप्ति होती है। मनोबल बढ़ा रहता है। स्त्री सुन्दर तथा स्वाभिमानिनी मिलती है। घरेलू जीवन उल्लासपूर्ण रहता है। सातवीं मित्रदृष्टि से चतुर्थभाव को देखने से माता, भूमि तथा भवन का सुख भी यथेष्ट मिलता है। ऐसा व्यक्ति सुखी, धनी तथा भाग्यशाली होता है।