भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

पृष्ठ 466, कुल 638 में से

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४७५ 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'पंचमभाव' स्थित 'चन्द्रमा' का फलादेश मकर लग्न: पंचमभाव : चंद्र पाँचवें भाव में सामान्य मित्र 'शुक्र' की राशि पर स्थित उच्च के 'चन्द्रमा' के प्रभाव से जातक को विद्या, बुद्धि एवं सन्तान के क्षेत्र में विशेष सफलता मिलती है। स्त्री तथा व्यवसाय-पक्ष से भी सुख मिलता है। सातवीं नीचदृष्टि से एकादशभाव को देखने से आमदनी के मार्ग में कुछ रुकावटें आती हैं। ऐसा व्यक्ति हँसमुख तथा हाजिरजवाब भी होता है। [चित्र १९६३: मकर लग्न, पंचम भाव (वृषभ राशि) में चन्द्र] 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'षष्ठभाव' स्थित 'चन्द्रमा' का फलादेश मकर लग्न : षष्ठभाव : चंद्र छठे भाव में मित्र 'बुध' की राशि पर स्थित 'चन्द्रमा' के प्रभाव से जातक शत्रु-पक्ष में विनम्रता से काम निकालता है। स्त्री से विरोध तथा व्यवसाय में कठिनाई का सामना भी करना पड़ता है। सातवीं मित्र-दृष्टि से द्वादशभाव को देखने से खर्च अधिक रहता है, परन्तु बाहरी स्थानों के सम्बन्ध से लाभ भी मिलता रहता है। [चित्र १९६४: मकर लग्न, षष्ठ भाव (मिथुन राशि) में चन्द्र] 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'सप्तमभाव' स्थित 'चन्द्रमा' का फलादेश मकर लग्न : सप्तमभाव : चंद्र सातवें भाव में स्वराशि में स्थित 'चन्द्रमा' के प्रभाव से जातक को सुन्दर स्त्री तथा उसके द्वारा यथेष्ट सुख की प्राप्ति होती है। व्यवसाय में भी पूर्ण सफलता मिलती है। घरेलू जीवन आनन्दमय बना रहता है। सातवीं शत्रुदृष्टि से प्रथमभाव को देखने से शारीरिक प्रभाव में कुछ असंतोषपूर्ण वृद्धि होती है। यश तथा व्यवसाय के क्षेत्र में भी असंतोष बना रहता है। [चित्र १९६५: मकर लग्न, सप्तम भाव (कर्क राशि) में चन्द्र]

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