भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४७४ 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'द्वितीयभाव' स्थित 'चन्द्रमा' का फलादेश मकर लग्न : द्वितीयभाव : चंद्र दूसरे भाव में शत्रु 'शनि' की राशि पर स्थित 'चन्द्रमा' के प्रभाव के जातक के धन तथा कुटुम्ब की वृद्धि होती है, परन्तु स्त्री के कारण कुछ परेशानी का अनुभव भी होता है। सातवीं मित्रदृष्टि से अष्टमभाव को देखने से आयु तथा पुरातत्त्व की शक्ति में वृद्धि होती है। ऐसे व्यक्ति का रहन-सहन अमीरी ढंग का होता है। 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'तृतीयभाव' स्थित 'चन्द्रमा' का फलादेश मकर लग्न : तृतीयभाव : चंद्र तीसरे भाव में मित्र 'गुरु' की राशि पर स्थित 'चन्द्रमा' के प्रभाव से जातक को भाई-बहिनों का श्रेष्ठ सुख मिलता है तथा पराक्रम की वृद्धि होती है। स्त्री, व्यवसाय तथा कुटुम्ब का सुख भी अच्छा रहता है। सातवीं मित्रदृष्टि से नवमभाव को देखने से भाग्य तथा धर्म की वृद्धि होती है। ऐसा व्यक्ति धनी, यशस्वी, सुखी तथा सम्पन्न होता है। 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'चतुर्थभाव' स्थित 'चन्द्रमा' का फलादेश मकर लग्न : चतुर्थभाव : चंद्र चौथे भाव में मित्र 'मंगल' की राशि पर स्थित 'चन्द्रमा' के प्रभाव से जातक को माता, भूमि तथा भवन का श्रेष्ठ सुख प्राप्त होता है। घरेलू वातावरण आनन्दमय रहता है। स्त्री सुन्दर मिलती है, व्यवसाय में भी सफलता मिलती है। सातवीं मित्रदृष्टि से दशमभाव को देखने से पिता, राज्य तथा स्थायी व्यवसाय के क्षेत्र में यश, प्रतिष्ठा, सहयोग, धन तथा अन्य लाभ प्राप्त होते रहते हैं।