भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४७३ 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'एकादशभाव' स्थित 'सूर्य' का फलादेश मकरलग्न : एकादशभाव : सूर्य ग्यारहवें भाव में मित्र 'मंगल' की राशि पर स्थित 'सूर्य' के प्रभाव से जातक की आमदनी में वृद्धि होती है, परन्तु कभी-कभी कुछ कठिनाइयां भी आती हैं। आयु तथा पुरातत्त्व की शक्ति का विशेष लाभ होता है। सातवीं शत्रु-दृष्टि से पंचमभाव को देखने से सन्तान-पक्ष से कष्ट रहता है तथा विद्याध्ययन के क्षेत्र में कठिनाइयां आती हैं। ऐसा व्यक्ति उग्र स्वभाव का होता है। 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'द्वादशभाव' स्थित 'सूर्य' का फलादेश मकरलग्न : द्वादशभाव : सूर्य बारहवें भाव में मित्र 'गुरु' की राशि पर स्थित 'सूर्य' के प्रभाव से जातक को खर्च तथा बाहरी सम्बन्धों में कठिनाई उपस्थित होती है। पेट में विकार भी रहता है। आयु तथा पुरातत्त्व की भी कुछ हानि होती है। सातवीं मित्र-दृष्टि से षष्ठभाव को देखने से शत्रु-पक्ष पर कुछ कठिनाइयों के साथ सफलता मिलती है तथा झगड़े-टंटे स्वयं ही दूर होते रहते हैं। 'मकर' लग्न में 'चन्द्रमा' 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'प्रथमभाव' स्थित 'चन्द्रमा' का फलादेश मकरलग्न : प्रथमभाव : चन्द्र पहले भाव में शत्रु 'शनि' की राशि पर स्थित 'चन्द्रमा' के प्रभाव से जातक के शारीरिक सौन्दर्य में वृद्धि होती है। वह विनोदी, मानी, यशस्वी तथा कार्य- कुशल भी होता है सातवीं दृष्टि से स्वराशि में सप्तमभाव को देखने से स्त्री सुन्दर, सुयोग्य तथा स्वाभिमानिनी मिलती है तथा दैनिक व्यवसाय के क्षेत्र में भी पूर्ण सफलता मिलती है।