भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

पृष्ठ 472, कुल 638 में से

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४८१ 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'एकादशभाव' स्थित 'मंगल' का फलादेश मकरलग्न : एकादशभाव : मंगल ग्यारहवें भाव में स्वराशि-स्थित 'मंगल' के प्रभाव से जातक की आमदनी में अत्यधिक वृद्धि होती होती है। माता, भूमि तथा भवन का यथेष्ट सुख भी प्राप्त होता है। चौथी शत्रु-दृष्टि से द्वितीय भाव को देखने से धन और कुटुम्ब का सुख कुछ कमी के साथ प्राप्त होता है। सातवीं सामान्य मित्र-दृष्टि से पंचमभाव को देखने से विद्या-बुद्धि तथा सन्तान का श्रेष्ठ सुख मिलता है। आठवीं मित्र-दृष्टि से षष्ठ भाव को देखने से शत्रु- पक्ष पर अत्यधिक प्रभाव रहता है तथा झगड़ों से लाभ होता है। 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'द्वादशभाव' स्थित 'मंगल' का फलादेश मकरलग्न : द्वादशभाव : मंगल बारहवें भाव में मित्र 'गुरु' की राशि पर स्थित 'मंगल' के प्रभाव से जातक का खर्च अधिक रहता है तथा बाहरी सम्बन्धों से लाभ होता है। माता, भूमि तथा भवन के सुख में कमी रहती है। चौथी मित्र-दृष्टि से तृतीय भाव को देखने से भाई-बहिनों का सुख मिलता है तथा पराक्रम में वृद्धि होती है। सातवीं मित्र-दृष्टि से षष्ठभाव को देखने से शत्रु- पक्ष पर प्रभाव बना रहता है। आठवीं नीच-दृष्टि से सप्तम भाव को देखने से स्त्री के सुख में कुछ कमी आती है तथा व्यवसाय-पक्ष में कुछ हानि उठानी पड़ती है। 'मकर' लग्न में 'बुध' 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'प्रथमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश मकरलग्न : प्रथमभाव : बुध पहले भाव में मित्र 'शनि' की राशि पर स्थित 'बुध' के प्रभाव से जातक के शारीरिक प्रभाव एवं प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है। यह शत्रु-पक्ष पर स्वविवेक से प्रभाव स्थापित करता है। सातवीं मित्र-दृष्टि से सप्तम भाव को देखने से स्त्री तथा व्यवसाय के पक्ष में सफलता मिलती है, परन्तु व्यवसाय में कभी-कभी कठिनाइयाँ भी आती हैं।

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