भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४८० 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'अष्टमभाव' स्थित 'मंगल' का फलादेश मकरलग्न : अष्टमभाव : मंगल आठवें भाव में मित्र 'सूर्य' की राशि पर स्थित 'मंगल' के प्रभाव से जातक की आयु तथा पुरातत्त्व की यथेष्ट शक्ति प्राप्त होती है, परन्तु माता, भूमि एवं भवन का सुख कुछ दुर्बल रहता है। चौथी दृष्टि से स्वराशि में एकादशभाव को देखने से आमदनी बहुत अच्छी रहती है। सातवीं शत्रु-दृष्टि से द्वितीय भाव को देखने से कुछ कमियों के साथ धन-संचय में सफलता मिलती है तथा कुटुम्ब का सुख सामान्य रहता है। आठवीं मित्र-दृष्टि से तृतीय भाव को देखने से भाई-बहिनों के सुख तथा पराक्रम में वृद्धि होती है। 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'नवमभाव' स्थित 'मंगल' का फलादेश मकरलग्न : नवमभाव : मंगल नवें भाव में मित्र 'बुध' की राशि पर स्थित 'मंगल' के प्रभाव से जातक के भाग्य तथा धर्म की उन्नति होती है। वह धनी, यशस्वी, धर्मात्मा तथा न्यायप्रिय होता है। चौथी मित्र-दृष्टि से द्वादशभाव को देखने के कारण खर्च अधिक रहता है तथा बाहरी स्थानों के सम्बन्ध से लाभ होता है। सातवीं मित्र-दृष्टि से तृतीयभाव को देखने से भाई-बहिनों के सुख तथा पराक्रम में वृद्धि होती है। आठवीं दृष्टि से स्वराशि में चतुर्थभाव को देखने से माता, भूमि एवं भवन का यथेष्ट सुख प्राप्त होता है। ऐसा व्यक्ति धनी, यशस्वी, सुखी, पराक्रमी तथा विनोदी होता है। 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'दशमभाव' स्थित 'मंगल' का फलादेश मकरलग्न : दशमभाव : मंगल दसवें भाव में सामान्य शत्रु 'शुक्र' की राशि पर स्थित 'मंगल' के प्रभाव से जातक को पिता, राज्य तथा व्यवसाय के क्षेत्र में सफलता मिलती है। चौथी शत्रु-दृष्टि से प्रथमभाव को देखने के शारीरिक सौन्दर्य, स्वास्थ्य एवं प्रभाव में वृद्धि होती है। सातवीं दृष्टि से स्वराशि में चतुर्थभाव को देखने के माता, भूमि तथा भवन का सुख प्राप्त होता है। आठवीं सामान्य मित्र-दृष्टि से पंचमभाव को देखने से सन्तान-पक्ष से सुख मिलता है तथा विद्या एवं बुद्धि की वृद्धि होती है।