भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

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४८३ 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'पंचमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश मकरलग्न : पंचमभाव : बुध [कुण्डली १२३७ : मकर लग्न, पंचम भाव (वृष राशि) में बुध] पाँचवें भाव में मित्र 'शुक्र' की राशि पर स्थित 'बुध' के प्रभाव से जातक को कुछ कठिनाइयों के साथ सन्तान, विद्या तथा बुद्धि के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। वह स्वपरिश्रम से आमदनी तथा धर्म की उन्नति भी करता है। शत्रु-पक्ष में भी सफलता मिलती है। सातवीं मित्र-दृष्टि से एकादश भाव को देखने से भाग्य की शक्ति में यथेष्ट वृद्धि होती है। 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'षष्ठभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश मकरलग्न : षष्ठभाव : बुध [कुण्डली १२३८ : मकर लग्न, षष्ठ भाव (मिथुन राशि) में बुध] छठे भाव में स्वराशि में स्थित 'बुध' के प्रभाव से जातक को शत्रु-पक्ष पर विजय प्राप्त होती है। भाग्य तथा धर्म की उन्नति में कुछ कठिनाइयां तो आती हैं, परन्तु बाद में वे दूर भी हो जाती हैं। सातवीं मित्र-दृष्टि से द्वादशभाव को देखने से खर्च अधिक रहता है तथा बाहरी स्थानों के सम्बन्ध से लाभ तथा सुख भी मिलता रहता है। 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'सप्तमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश मकरलग्न : सप्तमभाव : बुध [कुण्डली १२३९ : मकर लग्न, सप्तम भाव (कर्क राशि) में बुध] सातवें भाव में शत्रु 'चन्द्रमा' की राशि पर स्थित 'बुध' के प्रभाव से जातक स्वविवेक द्वारा भाग्य की अत्यधिक उन्नति करता है तथा व्यवसाय में सफलता प्राप्त करता है। स्त्री-पक्ष से अशान्ति मिलती है। व्यवसाय-पक्ष में कुछ कठिनाइयों साथ विशेष लाभ भी होता है। सातवीं मित्र-दृष्टि से प्रथमभाव को देखने से शारीरिक प्रभाव तथा यश की वृद्धि होती है। कभी- कभी बीमारियां तो आ घेरती हैं।