भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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४८४ 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'अष्टमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश मकरलग्न : अष्टमभाव : बुध आठवें भाव में मित्र 'सूर्य' की राशि पर स्थित 'बुध' के प्रभाव से जातक की आयु में वृद्धि होती है तथा पुरातत्त्व का लाभ होता है। भाग्योन्नति में बहुत बाधाएँ आती हैं तथा यश में भी कमी रहती है। शत्रु-पक्ष से भी अशान्ति मिलती है। सातवीं मित्र-दृष्टि से तृतीयभाव को देखने से कुछ कठिनाइयों के साथ धन तथा कुटुम्ब का सुख प्राप्त होता है तथापि दैनिक जीवन प्रभावपूर्ण बना रहता है। १९४० 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'नवमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश मकरलग्न : नवमभाव : बुध नवें भाव में स्वराशि स्थित उच्च के 'बुध' के प्रभाव से जातक के भाग्य तथा धर्म की विशेष उन्नति होती है। शत्रु-पक्ष पर सफलता प्राप्त होती है तथा झगड़ों से लाभ होता है। सातवीं नीचदृष्टि से तृतीय भाव को देखने के कारण भाइयों से विरोध रहता है तथा भाई-बहिन के सुख में कमी आती है। पराक्रम भी शिथिल बना रहता है। १९४१ 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'दशमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश मकरलग्न : दशमभाव : बुध दसवें भाव में मित्र 'शुक्र' की राशि पर स्थित 'बुध' के प्रभाव से जातक को पिता, राज्य एवं व्यव- साय के क्षेत्र में लाभ, प्रतिष्ठा, सहयोग तथा यश की प्राप्ति होती है। शत्रु-पक्ष पर विजय तथा धनोपार्जन में सफलता मिलती है। सातवीं मित्र-दृष्टि से चतुर्थ भाव को देखने से माता, भूमि एवं भवन का सुख प्राप्त होता है, परन्तु उन्नति के मार्ग में रुकावटें भी आती रहती हैं। १९४२