भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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४६१ 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'पंचमभाव' स्थित 'शुक्र' का फलादेश मकर लग्न : पंचमभाव : शुक्र पाँचवें भाव में स्वराशि-स्थित 'शुक्र' के प्रभाव से जातक की सन्तान तथा विद्या-बुद्धि का यथेष्ट लाभ होता है। पिता, राज्य तथा व्यवसाय के क्षेत्रों में भी सफलताएँ मिलती हैं। ऐसा व्यक्ति प्रायः हुकूमत- पसन्द तथा कायदे-कानून माता होता है। सातवीं शत्रुदृष्टि से नवम भाव की देखने से जातक की आमदनी यथेष्ट रहती है और वह निरन्तर उन्नति करता चला जाता। 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'षष्ठभाव' स्थित 'शुक्र' का फलादेश मकर लग्न : षष्ठभाव : शुक्र छठे भाव में मित्र 'बुध' की राशि पर स्थित 'शुक्र' के प्रभाव से जातक शत्रु-पक्ष पर प्रभाव रखता है। पिता से कुछ मतभेद के साथ शक्ति प्राप्त होती है तथा राज्य से सम्मान मिलता है किन्तु सन्तान तथा विद्या-पक्ष दुर्बल रहता है। सातवीं शत्रुदृष्टि से द्वादश भाव की देखने से खर्च अधिक रहता है, परन्तु बाहरी सम्बन्धों से लाभ मिलता रहता है। ऐसा व्यक्ति दिमागी रूप से भी चिन्तित बना रहता है। 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'सप्तमभाव' स्थित 'शुक्र' का फलादेश मकर लग्न : सप्तमभाव : शुक्र सातवें भाव में शत्रु 'चन्द्रमा' की राशि पर स्थित 'शुक्र' के प्रभाव से जातक को सुन्दर तथा सुयोग्य स्त्री मिलती है। पिता, राज्य, व्यवसाय, सन्तान तथा विद्या पक्ष से भी सुख मिलता है। घरेलू जीवन आनन्दपूर्ण रहता है। सातवीं मित्रदृष्टि से प्रथम भाव की देखने से शारीरिक सौन्दर्य एवं प्रभाव की प्राप्ति होती है। राजकीय तथा सामाजिक क्षेत्र में प्रतिष्ठा भी मिलती है।