भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४६२ 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'अष्टमभाव' स्थित 'शुक्र' का फलादेश मकर लग्न : अष्टमभाव : शुक्र आठवें भाव में शत्रु 'सूर्य' की राशि पर स्थित 'शुक्र' के प्रभाव से जातक को पुरातत्त्व एव आयु की शक्ति का लाभ होता है। पिता तथा सन्तान-पक्ष से कष्ट होता है एवं राज्य तथा विद्या का क्षेत्र त्रुटिपूर्ण रहता है। सातवीं मित्रदृष्टि से द्वितीयभाव को देखने से धन तथा कुटुम्ब का सुख प्राप्त होता है। ऐसा व्यक्ति अपने परिश्रम तथा गुप्त युक्तियों के बल पर उन्नति करता है। 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'नवमभाव' स्थित 'शुक्र' का फलादेश मकर लग्न : नवमभाव : शुक्र नवें भाव में मित्र 'बुध' की राशि पर स्थित नीच के 'शुक्र' के प्रभाव से जातक को भाग्योन्नति तथा धर्म-पालन में बाधाएँ आती हैं। पिता, राज्य, व्यवसाय, सन्तान तथा विद्या के क्षेत्र में त्रुटिपूर्ण सफलताएँ मिलती हैं। सातवीं उच्च तथा शत्रुदृष्टि से तृतीयभाव को देखने से भाई-बहिन के सुख तथा पराक्रम में वृद्धि होती है। ऐसा व्यक्ति अपने पुरुषार्थ से तरक्की करता है। 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'दशमभाव' स्थित 'शुक्र' का फलादेश मकर लग्न : दशमभाव : शुक्र दसवें भाव में स्वराशि-स्थित 'शुक्र' के प्रभाव से जातक को पिता, राज्य तथा व्यवसाय के क्षेत्र में अत्यधिक सहयोग, सम्मान तथा लाभ की प्राप्ति होती है। सन्तान तथा विद्या-पक्ष भी प्रबल रहता है। सातवीं शत्रुदृष्टि से चतुर्थ भाव को देखने से माता, भूमि तथा भवन का सुख भी प्राप्त होता है तथा घरेलू जीवन उल्लासमय बना रहता है।