भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५४ मूल त्रिकोणस्थ 'चन्द्र' मूल त्रिकोणस्थ 'चन्द्र' जिस जातक की जन्मकुण्डली में 'चन्द्रमा' मूल त्रिकोणस्थ (वृष राशि के ४ से ३० अंश तक) हो, वह सुन्दर, भाग्यवान्, ऐश्वर्यशाली, धन- वान, भोगी तथा सुखी जीवन व्यतीत करने वाला होता है। मूल त्रिकोणस्थ 'मंगल' मूल त्रिकोणस्थ 'मंगल' जिस जातक की जन्मकुण्डली में 'मंगल' मूल त्रिकोणस्थ (मेष राशि के १८ अंश तक) हो, वह सामान्य धनी, अपयशी, स्वार्थी, क्रोधी, दुष्ट, निर्दय, लम्पट, खल, चरित्रहीन, क्रूर, धर्मी तथा साहसी होता है। मूलत्रिकोणस्थ 'बुध' मूल त्रिकोणस्थ 'बुध' जिस जातक की जन्मकुण्डली में 'बुध' मूल त्रिकोणस्थ (कन्या राशि के १६ से २० अंश तक) हो, वह विद्वान्, राजमान्य, धनवान्, प्राध्यापक चिकित्सक, सैनिक, व्यवसायी, महत्त्वाकांक्षी, विजयी, विनोदी तथा बुद्धिमान होता है। मूलत्रिकोणस्थ 'गुरु' मूल त्रिकोणस्थ 'गुरु' जिस जातक की जन्मकुण्डली में 'गुरु' मूल त्रिकोणस्थ (धनु राशि के १३ अंश तक) हो, वह तपस्वी, सुखी, यशस्वी, सम्मानित, राजप्रिय, भोगी, उच्च अधिकारी, परम बुद्धिमान तथा नगर या मठ का स्वामी होता है।