भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१० किया गया है। ग्रहों के पारस्परिक सम्बन्ध, युति, अंश, उच्च-नीचादि स्थिति बादि अनेक ज्ञातव्य विषयों का विवरण भी इसमें संकलित है। फलित-ज्योतिष सम्बन्धी अन्य विषयों को भी स्थान देकर, इसे सर्वसाधारण के लिए अधिका- धिक उपयोगी बनाने का प्रयत्न भी किया गया है। परन्तु, इस एक ही ग्रंथ द्वारा ज्योतिष-विद्या से सर्वथा अपरिचित सामान्य व्यक्ति भी पर्याप्त लाभ उठा सकते हैं तथा किसी भी स्त्री-पुरुष की जन्मकुण्डली के ग्रहों का फलादेश ज्ञात कर सकते हैं। विषय-वस्तु को अधिकाधिक बोधगम्य बनाने की भी भरसक चेष्टा की गई है। अपने प्रयत्न में हम कहाँ तक सफल हुए हैं, इसे विज्ञ पाठक- गण स्वयं ही अनुभव कर सकेंगे। • आज से लगभग ५ वर्ष पूर्व भी हमने एक ऐसे ही ग्रंथ की रचना की थी, जिसे पाठकों का स्नेह प्राप्त हुआ था। प्रस्तुत ग्रंथ उसी परिपाटी में, अधिक बोधगम्य तथा सुगठित रूप में प्रस्तुत किया गया है। आशा है इसे भी पाठकों का स्नेह मिलेगा। ग्रंथ के प्रणयन में हमें जिन सूत्रों से सहायता मिली है, उन सबके प्रति हम हृदय से आभारी हैं। • मानव-कृति दोष-विहीन नहीं होती, अतः विज्ञ सुधीजनों ने निवेदन है कि वे इस ग्रंथ की त्रुटियों की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करने की कृपा करें, ताकि इसके आगामी संस्करण में उनका निराकरण किया जा सके। कृष्णपुरी, मथुरा रामनवमी : सं० २०३२ वि० } —राजेश दीक्षित