भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
पृष्ठ 6, कुल 638 में से
संदर्भ में पढ़ेंविषय-सूची प्रथम खण्ड [आवश्यक ज्ञातव्य] क्र० सं० पृष्ठ-संख्या १. ग्रह-शान्ति के उपाय १८ २. प्रारम्भिक जानकारी १६ ३. तिथि अथवा मिति १६ ४. तिथियों के स्वामी २० ५. नक्षत्र २० ६. नक्षत्रों के स्वामी २१ ७. नक्षत्रों के चरणाक्षर २२ ८. वार २२ ६. राशि २३ १०. राशि के चरणाक्षर २४ ११. ग्रह—स्वभाव और प्रभाव २५ १२. राशि—स्वभाव और प्रभाव २७ १३. राशियों के स्वामी २६ १४. राशिशबोधक चक्र ३० १५. ग्रहों का राशि-भोग-काल ३० १६. ग्रहों की वक्री तथा अतिचारी गति ३१ १७. ग्रहों की नैसर्गिक मैत्री ३१ १८. ग्रहों के अंग ३२ १६. जन्मकुण्डली के द्वादश भाव ३३ २०. भावों की त्रिकोण, केन्द्रादि संज्ञा ३६ २१. मूल त्रिकोण ३७ २२. ग्रहों की उच्च स्थिति ३६ २३. ग्रहों की नीच स्थिति ४० २४. ग्रहों का बलाबल ४० २५. ग्रहों के पद ४२ २६. ग्रहों के ६ प्रकार के बल ४२ २७. ग्रहों की दृष्टि ४५ २८. उच्चराशिस्थ ग्रहों का फलादेश ५१ २६. मूल त्रिकोणस्थ ग्रहों का फलादेश ५३ ३०. स्वक्षेत्रस्थ ग्रहों का फलादेश ५६ ३१. मित्रक्षेत्रस्थ ग्रहों का फलादेश ५८ ३२. शत्रुक्षेत्रस्थ ग्रहों का फलादेश ६१ क्र० सं० पृष्ठ संख्या ३३. नीचराशिस्थ ग्रहों का फलादेश ६३ ३४. ग्रहों का दृष्टि-सम्बन्ध और स्थान-सम्बन्ध ६६ ३५. ग्रहों का जातक के जीवन पर प्रभाव ६७ ३६. लग्न और राशि ६७ ३७. स्थानाधिपति ७१ ३८. स्थानाधिपतियों के नाम ७१ ३६. विशिष्ट ज्ञातव्य विषय ७२ ४०. दैनिक ग्रहगोचर का प्रभाव ७६ ४१. सम्मिलित परिवार का फलादेश ७६ ४२. गलत जन्म-कुण्डली का संशोधन ७७ द्वितीय खण्ड [फलादेश] १. विभिन्न लग्नों वाली जन्म-कुण्डलियों का फलादेश जानने की विधि ८० 'मेष लग्न' २. 'मेष' लग्न का फलादेश ८२ ३. 'सूर्य' का फलादेश ८३ ४. 'चन्द्रमा' का फलादेश ८३ ५. 'मंगल' का फलादेश ८४ ६. 'बुध' का फलादेश ८४ ७. 'गुरु' का फलादेश ८५ ८. 'शुक्र' का फलादेश ८६ ६. 'शनि' का फलादेश ८६ १०. 'राहु' का फलादेश ८७ ११. 'केतु' का फलादेश ८७ १२. 'सूर्य' ८८ १३. 'चन्द्रमा' ६२ १४. 'मंगल' ६६ १५. 'बुध' १०० १६. 'गुरु' १०४ १७. 'शुक्र' १०८ १८. 'शनि' ११२ १६. 'राहु' ११६ २०. 'केतु' ११९