भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५४७ 'कुंभ' लग्न की कुण्डली में 'एकादशभाव' स्थित 'केतु' का फलादेश कुम्भ लग्न : एकादशभाव : केतु ग्यारहवें भाव में सामान्य मित्र 'गुरु' की राशि पर स्थित 'केतु' के प्रभाव से जातक की आमदनी में अत्यधिक वृद्धि होती है तथा कभी-कभी आकस्मिक रूप से भी धन लाभ होता है। कभी कठिनाइयां आने पर भी धैर्य नहीं छोड़ता। ऐसा व्यक्ति अपनी उन्नति के लिए प्रयत्नशील रहता है तथा न्याय-मार्ग से अत्यधिक धन कमाता और सुखी रहता है। 'कुंभ' लग्न की कुण्डली में 'द्वादशभाव' स्थित 'केतु' का फलादेश कुम्भ लग्न : द्वादशभाव : केतु बारहवें भाव में मित्र 'शनि' की राशि पर स्थित 'केतु' के प्रभाव से जातक का खर्च अधिक रहता है, जिसके कारण परेशानी का अनुभव होता है, परन्तु वह अपनी गुप्त युक्तियों से उन पर विजय पाता है तथा निराशाओं में डूब जाने पर भी कभी हिम्मत नहीं हारता। उसे बाहरी स्थानों के सम्बन्ध से लाभ भी होता रहता है।