भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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५४६ 'मीन' लग्न वालों को अपनी जन्म-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित विभिन्न ग्रहों का स्थायी फलादेश आगे दी गई उदाहरण-कुण्डली संख्या १३१५ से १४२२ के बीच देखना चाहिए। गोचर-कुण्डली के ग्रहों का फलादेश किन उदाहरण-कुण्डलियों में देखें, इसे आगे लिखे अनुसार समझ लेना चाहिए। 'मीन' लग्न में 'सूर्य' का फलादेश १—'मीन' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'सूर्य' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या १३१५ से १३२६ के बीच देखना चाहिए। २—'मीन' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'सूर्य' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस महीने में 'सूर्य'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या १३१५ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या १३१६ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या १३१७ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या १३१८ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या १३१६ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या १३२० (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या १३२१ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या १३२२ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या १३२३ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या १३२४ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या १३२५ (ट) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या १३२६ 'मीन' लग्न में 'चन्द्रमा' का फलादेश १—'मीन' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'चन्द्रमा' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या १३२७ से १३३८ के बीच देखना चाहिए। २—'मीन' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित