भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५६३ 'मीन' लग्न की कुण्डली में 'द्वितीयभाव' स्थित 'मंगल' का फलादेश मीनलग्न : द्वितीयभाव : मंगल दूसरे भाव में स्वराशि-स्थित मंगल के प्रभाव से जातक के धन तथा कुटुम्ब की वृद्धि होती है। चौथी नीच-दृष्टि से पंचम भाव को देखने से विद्या एवं सन्तान के क्षेत्र में कुछ कमी रहती है। सातवीं सामान्य मित्र-दृष्टि से अष्टम भाव को देखने से आयु तथा पुरातत्त्व की शक्ति में वृद्धि होती है। आठवीं दृष्टि से स्वराशि में नवम भाव को देखने से भाग्य तथा धर्म की विशेष उन्नति होती है। ऐसे व्यक्ति का रहन-सहन ठाठ- बाट का होता है। १३४० 'मीन' लग्न की कुण्डली में 'तृतीयभाव' स्थित 'मंगल' का फलादेश मीनलग्न : तृतीयभाव : मंगल तीसरे भाव में सामान्य मित्र 'शुक्र' की राशि पर स्थित 'मंगल' के प्रभाव से जातक के पराक्रम की विशेष वृद्धि होती है तथा धन-कुटुम्ब का सुख भी मिलता