भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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५६० 'मीन' लग्न की कुण्डली के 'एकादशभाव' स्थित 'केतु' का फलादेश मीन लग्न : एकादशभाव : केतु ग्यारहवें भाव में मित्र 'शनि' की राशि पर स्थित 'केतु' के प्रभाव से जातक की आमदनी में अत्य- धिक वृद्धि होती है। कभी-कभी कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ता है, परन्तु वह साहस एवं धैर्य के साथ उन पर विजय पा लेता है। ऐसा व्यक्ति बड़ा बहादुर, धैर्यवान्, हिम्मती तथा स्वार्थी होता है।

'मीन' लग्न की कुण्डली के 'द्वादशभाव' स्थित 'केतु' का फलादेश मीन लग्न : द्वादशभाव : केतु बारहवें भाव में मित्र 'शनि' की राशि पर स्थित 'केतु' के प्रभाव से जातक को खर्च के कारण कष्टों का अनुभव होता है तथा बाहरी स्थानों के सम्बन्धों से भी असन्तोष मिलता है। परन्तु वह अपनी गुप्त युक्तियों, धैर्य तथा परिश्रम के बल पर कठिनाइयों का साहस के साथ मुकाबला करता है तथा उन पर विजय पाकर उन्नति लाभ करता है।